बिहार में इन दिनों कानून-व्यवस्था को लेकर सख्ती का नया दौर देखने को मिल रहा है। पुलिस और STF की संयुक्त कार्रवाई के तहत चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ अब अपराधियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इस अभियान के जरिए पुलिस अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने और राज्य में कानून का डर कायम करने की कोशिश कर रही है।
2026 की शुरुआत से अब तक बिहार में कई बड़े एनकाउंटर सामने आ चुके हैं। लूट, हत्या, रंगदारी और गैंगवार से जुड़े अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। 18 मई को सीवान में 20 लाख की लूट के आरोपी को पुलिस मुठभेड़ में दोनों घुटनों में गोली लगी, जबकि पटना के ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में शिक्षक पर फायरिंग करने वाले आरोपी को भी पुलिस ने घायल कर दिया।
इससे पहले बिहटा, भागलपुर और पटना समेत कई जिलों में अपराधियों के खिलाफ एनकाउंटर हुए हैं। STF ने सूर्या डॉन, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े शूटर और 300 किलो गोल्ड लूटकांड के मास्टरमाइंड जैसे कुख्यात अपराधियों पर भी कार्रवाई की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ सिर्फ पुलिस अभियान नहीं, बल्कि अपराधियों को सख्त संदेश देने की रणनीति है कि बिहार में अब कानून से ऊपर कोई नहीं। हालांकि विपक्ष इसे लेकर सवाल भी उठा रहा है और पुलिस कार्रवाई की शैली पर बहस तेज हो गई है।
फिलहाल बिहार में अपराध बनाम कानून की यह लड़ाई नए मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां सख्ती, सुरक्षा और सियासत तीनों एक साथ चर्चा के केंद्र में हैं।
















