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खगड़िया के गांधीनगर पसराहा में शोक की लहर, कारगिल युद्ध के जांबाज़ योद्धा ने लखनऊ कमांड हॉस्पिटल में ली अंतिम सांस

खगड़िया की धरती आज गम और गर्व दोनों भावनाओं से भरी हुई है। गांधीनगर पसराहा निवासी, कारगिल युद्ध के वीर योद्धा एवं भारतीय सेना के पूर्व नायक परमानंद सिंह के निधन की खबर ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। लंबी बीमारी के बाद लखनऊ स्थित कमांड हॉस्पिटल में उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही उनके निधन की सूचना गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में मातमी सन्नाटा पसर गया।

परमानंद सिंह सिर्फ एक सैनिक नहीं, बल्कि देशभक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की जीवंत मिसाल थे। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने दुश्मनों के खिलाफ मोर्चे पर डटकर मुकाबला किया और अपनी वीरता से भारतीय सेना का गौरव बढ़ाया। बताया जाता है कि जब कारगिल की बर्फीली चोटियों पर गोलियों की गूंज सुनाई दे रही थी, तब परमानंद सिंह जैसे जांबाज़ सैनिकों ने अपने अदम्य साहस से दुश्मनों के नापाक मंसूबों को नाकाम किया था।

सेना में सेवा के दौरान उनका जीवन अनुशासन, सादगी और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा। रिटायरमेंट के बाद भी वे युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहे। गांव और आसपास के लोग उन्हें सिर्फ एक पूर्व सैनिक नहीं, बल्कि गौरव और सम्मान की मिसाल के रूप में देखते थे।

उनका परिवार भी देशसेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उनके बड़े पुत्र राजीव रंजन भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि दूसरे पुत्र धीरज कुमार सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। परिवार के छोटे भाई और पूर्व सूबेदार धनिक लाल सिंह ने भावुक होकर कहा कि उनका परिवार हमेशा राष्ट्र सेवा को सर्वोपरि मानता आया है। वहीं बड़े भाई अधिक लाल सिंह ने कहा कि परमानंद सिंह का पूरा जीवन मातृभूमि को समर्पित रहा और वे सच्चे अर्थों में मिट्टी के सपूत थे।

गांव में जैसे ही उनके निधन की खबर पहुंची, लोगों की आंखें नम हो गईं। ग्रामीणों, पूर्व सैनिकों और परिजनों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

जानकारी के अनुसार बुधवार को उनके पार्थिव शरीर को अगुवानी घाट लाया जाएगा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ गॉड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। हर कोई अपने इस वीर सपूत को आखिरी बार नमन करने को आतुर है।

परमानंद सिंह का निधन सिर्फ एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनकी वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों को हमेशा यह संदेश देती रहेगी कि देश की रक्षा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।

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