Bihar समेत पूरे उत्तर भारत में लगातार बढ़ रही गर्मी अब सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रही है। तेज धूप, हीट वेव और लगातार बढ़ते तापमान के कारण लोगों में थकान, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और नींद की कमी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोगों में काम पर फोकस कम होना, बिना वजह गुस्सा आना और मानसिक असंतुलन जैसे लक्षण भी देखने को मिल रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी में शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। इससे शरीर जल्दी थक जाता है और मानसिक कमजोरी महसूस होने लगती है। डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी इस समस्या को और गंभीर बना देती है। इससे दिमाग तक ऑक्सीजन और ब्लड फ्लो प्रभावित होता है, जिससे याददाश्त, फोकस और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि गर्मी के दौरान हीट स्ट्रोक की स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो पसीना आना बंद हो सकता है। इसके साथ सांस लेने में दिक्कत, तेज सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी और बेहोशी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। गंभीर स्थिति में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
मेंटल हेल्थ विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में करीब 8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जाती है। इसका मुख्य कारण डिहाइड्रेशन, खराब नींद और दिनचर्या में बदलाव है। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन होने से ब्रेन फंक्शन प्रभावित होता है, जिससे मूड स्विंग और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है।
लगातार गर्मी के कारण शरीर की सर्केडियन रिद्म यानी नींद-जागने का प्राकृतिक चक्र भी प्रभावित होता है। इससे नींद की गुणवत्ता खराब हो जाती है और लोग दिनभर सुस्ती, कम ऊर्जा और मानसिक थकान महसूस करते हैं।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक धूप में निकलने से बचें। हल्के, ढीले और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। सफेद रंग के कपड़े और छतरी का इस्तेमाल अधिक फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह कम गर्मी सोखते हैं। पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लेना बेहद जरूरी है। साथ ही ताजे फल, सलाद और हल्का भोजन शरीर और दिमाग दोनों को संतुलित रखने में मदद करता है।
डॉक्टरों ने यह भी कहा है कि ज्यादा कैफीन, शुगर ड्रिंक, जंक फूड और देर रात तक मोबाइल स्क्रीन का इस्तेमाल मानसिक तनाव को बढ़ा सकता है। सुबह या शाम के समय हल्की वॉक, डीप ब्रीदिंग और नियमित दिनचर्या मानसिक स्थिरता बनाए रखने में सहायक हो सकती है।
















