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पटना के 25 करोड़ रुपये स्मैक कांड में बड़ी सफलता, फरार सिपाही ऋषिकेश रांची से गिरफ्तार

पटना : बिहार के चर्चित 25 करोड़ रुपये के स्मैक बरामदगी मामले में पटना पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। इस हाई-प्रोफाइल ड्रग रैकेट का मुख्य और नामजद फरार आरोपी बिहार पुलिस का सिपाही ऋषिकेश क्रांतिकारक उर्फ अनीश आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस की विशेष टीम ने उसे झारखंड की राजधानी रांची से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

मूल रूप से नवादा जिले का रहने वाला ऋषिकेश बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत था। वह पटना के आलमगंज थाना कांड संख्या 293/26 में नामजद आरोपी था और लंबे समय से फरार चल रहा था।

आलमगंज थाना कांड में सामने आया था नाम

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ था जब पटना पुलिस ने करीब 25 करोड़ रुपये मूल्य की भारी मात्रा में स्मैक बरामद की थी। मामले में पुलिस पहले ही समस्तीपुर निवासी जितेंद्र कुमार और जहानाबाद निवासी नीतीश कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने कई अहम खुलासे किए थे, जिसमें सिपाही ऋषिकेश की भूमिका सामने आई।

जांच एजेंसियों के अनुसार, ऋषिकेश इस पूरे ड्रग सिंडिकेट की सबसे अहम कड़ी था और नेटवर्क को संचालित करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

ट्रांसफर के बाद से था फरार

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सिपाही पहले गया में तैनात था। जुलाई 2025 में उसका तबादला भागलपुर किया गया था, लेकिन उसने नई पोस्टिंग पर योगदान नहीं दिया। इसके बाद से ही वह फरार चल रहा था।

इस दौरान पुलिस ने पटना के आलमगंज और रामकृष्ण नगर इलाके में छापेमारी कर उसके बैंक दस्तावेज, चेकबुक और सर्विस रिकॉर्ड समेत कई अहम कागजात बरामद किए थे। इन दस्तावेजों से ड्रग नेटवर्क में पुलिसकर्मी की संलिप्तता के पुख्ता संकेत मिले।

वर्दी की आड़ में होती थी तस्करी

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पटना को केंद्र बनाकर स्मैक की प्रोसेसिंग और सप्लाई का बड़ा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। इस धंधे के लिए कच्चा माल उत्तर प्रदेश के मुगलसराय और गाजीपुर से मंगाया जाता था। इसके बाद ट्रेन, कूरियर और सड़क मार्ग के जरिए बिहार में इसकी सप्लाई की जाती थी।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जब सड़क मार्ग से नशे की खेप लाई जाती थी, तब आरोपी सिपाही ऋषिकेश पुलिस की वर्दी पहनकर वाहन में साथ रहता था। इससे पुलिस चेकपोस्ट और नाकों पर आसानी से जांच से बचा जा सके।

बेउर जेल से जुड़ा नेटवर्क

जांच में इस ड्रग सिंडिकेट का कनेक्शन पटना की बेउर जेल से भी जुड़ा पाया गया है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि जेल में बंद एक कथित ‘दादा’ इस पूरे नेटवर्क को अंदर से संचालित कर रहा था।

इस मामले में आलमगंज और रामकृष्ण नगर थानों में जितेंद्र, नीतीश और पटनदेवी इलाके के राहुल यादव समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सिपाही ऋषिकेश की गिरफ्तारी के बाद इस ड्रग नेटवर्क से जुड़े कई और सफेदपोश चेहरों का खुलासा हो सकता है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर नेटवर्क की पूरी कड़ी खंगालने में जुटी है।

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