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बिहार की राजनीति में बड़ा फेरबदल, चेतन आनंद को मिली बड़ी जिम्मेदारी

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक और सियासी बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने Janata Dal (United) के विधायक Chetan Anand को राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का सदस्य नियुक्त किया है। इस फैसले के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हाल ही में पुनर्गठित की गई इस समिति के अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी होंगे। वहीं उपाध्यक्ष के रूप में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Sanjay Saraogi और जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष Umesh Singh Kushwaha को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। समिति के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी डिप्टी सीएम Vijay Kumar Choudhary को सौंपी गई है।

इस समिति में कुल 12 सदस्यों को शामिल किया गया है। इनमें चेतन आनंद के अलावा संगीता कुमारी, भरत बिंद, मुरारी प्रसाद गौतम, सिद्धार्थ सौरव, ललन कुमार मंडल, प्रहलाद यादव, जगन्नाथ ठाकुर, राजेश कुमार वर्मा, भारती मेहता और चंदन कुमार सिंह जैसे नाम शामिल हैं। इसके साथ ही मोकामा से विधायक Neelam Devi को भी समिति में जगह दी गई है।

सरकारी अधिसूचना के अनुसार समिति के सदस्यों को उप मंत्री का दर्जा मिलेगा। इसका मतलब है कि विधायक या एमएलसी होने के बावजूद उन्हें अतिरिक्त सरकारी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। वहीं उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री स्तर की सुविधाएं मिलेंगी। इस संबंध में बिहार मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

बताया जा रहा है कि समिति में आगे भी कुछ नए नाम जोड़े जा सकते हैं और खाली पदों पर बाद में मनोनयन किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस फैसले के पीछे सत्ता संतुलन साधने की रणनीति भी हो सकती है।

दरअसल, चेतन आनंद को मंत्री पद नहीं मिलने के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी की चर्चा लंबे समय से चल रही थी। चेतन आनंद पहले Rashtriya Janata Dal से जुड़े थे और बाद में जेडीयू में शामिल हुए थे। उनके पिता Anand Mohan बिहार की राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं और हाल के दिनों में उनके कुछ बयानों ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ाई थी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि समिति में चेतन आनंद और अन्य प्रभावशाली नेताओं को शामिल कर सरकार ने उन नेताओं को साधने की कोशिश की है, जो मंत्री पद की दौड़ में थे लेकिन उन्हें जगह नहीं मिल पाई। एक ओर इसे राजनीतिक संतुलन बनाने की कवायद माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे “संतुष्टि प्रबंधन” की रणनीति बता रहा है।

फिलहाल बिहार की राजनीति में यह नया फेरबदल आने वाले दिनों में गठबंधन के भीतर कई नए समीकरण पैदा कर सकता है।

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