मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर शहर में गुरुवार तड़के एक दर्दनाक हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। ब्रह्मपुरा स्थित निजी अस्पताल Prasad Hospital की आईसीयू में भीषण आग लगने से कई मरीज इसकी चपेट में आ गए। प्रशासन ने फिलहाल चार लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय स्तर पर मृतकों की संख्या अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। कई मरीज गंभीर रूप से झुलस गए हैं और उनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है।
तड़के 3:20 बजे आईसीयू में मचा हड़कंप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह करीब 3:20 बजे आईसीयू से धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। शुरुआती आशंका है कि शॉर्ट सर्किट के बाद वेंटिलेटर और अन्य चिकित्सा उपकरणों में आग लग गई, जिसने देखते ही देखते पूरे आईसीयू को अपनी चपेट में ले लिया।
कुछ ही मिनटों में आईसीयू धुएं से भर गया और अंदर भर्ती मरीजों की सांसें घुटने लगीं। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
आईसीयू में भर्ती थे 12 से 15 मरीज
जानकारी के अनुसार हादसे के समय आईसीयू में 12 से 15 मरीज भर्ती थे। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि आग लगने के समय आईसीयू में कोई अटेंडेंट मौजूद नहीं था।
परिजनों का कहना है कि आग लगने के बाद उन्होंने स्वयं मरीजों को बाहर निकालने का प्रयास किया, जबकि अस्पताल के कई कर्मचारी मौके से गायब हो गए। इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और जांच जारी है।
बंद था आईसीयू का मुख्य गेट, परिजनों का आरोप
मरीजों के परिजनों ने जिला प्रशासन को बताया कि आग लगने के समय आईसीयू वार्ड का मुख्य गेट बंद था। उनका आरोप है कि इसी कारण मरीज समय पर बाहर नहीं निकल सके और कई लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
क्षमता से अधिक भर्ती थे मरीज
मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी Subrat Kumar Sen ने बताया कि जिस आईसीयू की क्षमता 13 बेड की थी, वहां 15 मरीज भर्ती पाए गए। प्रशासन इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि क्या अस्पताल ने निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया था।
फायर सेफ्टी व्यवस्था पर उठे सवाल
हादसे के बाद अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने के बाद अस्पताल का फायर हाइड्रेंट सिस्टम प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सका।
आग इतनी भीषण थी कि सुबह तक अस्पताल परिसर में धुएं और जलने की गंध फैली रही। घटना के बाद मृतकों और घायलों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई।
20 मरीजों को सुरक्षित निकाला गया
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। राहत और बचाव अभियान के दौरान करीब 20 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घायलों को आसपास के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
अस्पताल सील, जांच जारी
जिलाधिकारी ने बताया कि पूरे मामले की गहन जांच कराई जा रही है। यदि जांच में लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी या अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल अस्पताल परिसर को सील कर दिया गया है और प्रशासन विभिन्न पहलुओं से मामले की जांच में जुटा हुआ है।
हादसे ने खड़े किए कई सवाल
मुजफ्फरपुर का यह हादसा निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे स्पष्ट हो सकेगा कि इस दर्दनाक घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और जिम्मेदारी किसकी थी।

















