पटना। बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव और विपक्षी एकजुटता को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री एवं Chirag Paswan ने INDI गठबंधन की बैठक, सुरक्षा व्यवस्था और राजद की राजनीतिक कार्यशैली पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने विपक्षी गठबंधन को अवसरवादी बताते हुए कहा कि यह वैचारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक मजबूरियों और एक-दूसरे की कमजोरियों को छिपाने का गठजोड़ है।
INDI गठबंधन की बैठक को लेकर चिराग पासवान ने कहा कि दक्षिण भारत में M. K. Stalin की पार्टी Dravida Munnetra Kazhagam की नाराजगी की खबरें इस बात का संकेत हैं कि कांग्रेस अपने पुराने सहयोगियों का विश्वास बनाए रखने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता की राजनीति में कांग्रेस ने अपने सहयोगियों के साथ धोखा किया है, जिसके कारण कई दल उससे दूरी बनाने लगे हैं।
उन्होंने Mamata Banerjee का जिक्र करते हुए कहा कि जिनके खिलाफ कभी Rahul Gandhi और कांग्रेस नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए थे, वही आज गठबंधन की बैठकों में शामिल हो रही हैं। चिराग ने तंज कसते हुए कहा कि यह गठबंधन विचारधारा का नहीं, बल्कि राजनीतिक समझौते का मंच बन गया है, जहां दल एक-दूसरे के विवादों और कमियों पर पर्दा डाल रहे हैं।
विधान परिषद चुनाव में अशरफ अंसारी की तारीफ
विधान परिषद चुनाव पर बोलते हुए चिराग पासवान ने अपनी पार्टी की उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के विधायकों की बदौलत विधान परिषद में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ने जा रहा है। पार्टी उम्मीदवार अशरफ अंसारी की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि वे स्वर्गीय Ram Vilas Paswan के पुराने सहयोगी रहे हैं।
चिराग ने कहा कि अशरफ अंसारी ने कभी पद या लाभ की अपेक्षा नहीं की, बल्कि हर कठिन दौर में पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहे। ऐसे समर्पित कार्यकर्ता को विधान परिषद भेजना पार्टी के लिए गर्व की बात है।
सुरक्षा व्यवस्था के राजनीतिकरण पर जताई आपत्ति
राबड़ी देवी की सुरक्षा वापस लिए जाने के सवाल पर चिराग पासवान ने कहा कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों के आकलन और परिस्थितियों के अनुसार समय-समय पर सुरक्षा बढ़ाई या घटाई जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा भी कई बार बढ़ाई और घटाई गई है, इसलिए इसे राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए।
लालू-तेजस्वी की अनुपस्थिति पर साधा निशाना
विधान परिषद नामांकन के दौरान Lalu Prasad Yadav और Tejashwi Yadav की अनुपस्थिति को लेकर भी चिराग पासवान ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इससे पार्टी नेतृत्व की गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना था कि जिस पद और जिम्मेदारी के लिए उम्मीदवार मैदान में उतर रहा है, उसके प्रति नेतृत्व की प्रतिबद्धता भी दिखाई देनी चाहिए।
चिराग पासवान के इन बयानों के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी का दौर और तेज होने की संभावना है। विधान परिषद चुनाव और आगामी राजनीतिक समीकरणों के बीच उनके हमलों को विपक्षी दलों के लिए नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।


















