पटना। बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले और कथित कमीशनखोरी मामले में जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की कार्रवाई अब उन प्रभावशाली लोगों तक पहुंच रही है, जिन पर सरकारी ठेकों और कमीशनखोरी के नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं।
चर्चित ठेकेदार रिशु श्री उर्फ रिशु रंजन सिन्हा की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों ने मामले में तेजी लाते हुए कई अधिकारियों और उनसे जुड़े ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में गुरुवार सुबह आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस से जुड़े ठिकानों पर दबिश दी।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों की टीम सुबह से ही उनके आवास और अन्य संभावित स्थानों पर दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों से जुड़े साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। बताया जा रहा है कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। वहीं, संजीव हंस के फरार होने की भी चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि सरकारी टेंडरों के आवंटन, परियोजनाओं और ठेका प्रक्रियाओं में एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था। आरोप है कि इस नेटवर्क में बिचौलियों, ठेकेदारों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन किए गए।
सूत्रों का कहना है कि रिशु श्री से पूछताछ और उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। इन्हीं जानकारियों के आधार पर जांच एजेंसियां अब मामले की विभिन्न कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
टेंडर घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कथित कमीशनखोरी के उस नेटवर्क की तस्वीर भी सामने आ रही है, जिसमें सरकारी ठेकों के बदले मोटी रकम वसूलने और प्रभाव का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। जांच टीम बैंक खातों, संपत्तियों, व्हाट्सएप चैट, डिजिटल डेटा और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है।
फिलहाल EOU और SVU की कार्रवाई जारी है। अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। बिहार के इस चर्चित टेंडर घोटाले में आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



















