बिहार में प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक और हाईटेक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत अब आम नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) के जरिए खुद अपना डेटा भरने की सुविधा दी जा रही है। इस नई डिजिटल प्रक्रिया की शुरुआत उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने स्वयं फॉर्म भरकर की।
डिजिटल गवर्नेंस की ओर बड़ा कदम
इस पहल को प्रशासनिक और सियासी हलकों में डिजिटल गवर्नेंस का नया मील का पत्थर माना जा रहा है।
विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि यह तकनीक न सिर्फ प्रक्रिया को आसान बनाएगी, बल्कि आम लोगों को सीधे तौर पर जनगणना में भागीदारी का मौका भी देगी।

क्या बदलेगा इस बार?
पहले जनगणना के दौरान प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर जानकारी जुटाते थे, जिससे समय और संसाधनों की चुनौती सामने आती थी।
अब:
- नागरिक खुद ऑनलाइन डेटा भर सकेंगे
- प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज होगी
- आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता बढ़ेगी
हालांकि, इस बार भी प्रगणक अपनी भूमिका निभाएंगे, लेकिन डिजिटल सुविधा से काम और आसान हो जाएगा।
यूज़र-फ्रेंडली प्लेटफॉर्म
अधिकारियों के अनुसार, इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आम लोग भी आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकें।
यह पहल:
- जनभागीदारी को मजबूत करेगी
- सरकारी तंत्र पर बोझ कम करेगी
- समय और लागत दोनों बचाएगी
डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम
यह पहल डिजिटल इंडिया की तर्ज पर बिहार में प्रशासनिक सुधारों का मजबूत उदाहरण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल सफल रहा, तो आने वाले समय में यह अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है।
क्या कहती है तस्वीर?
अब नजर इस बात पर है कि आम जनता इस डिजिटल स्व-गणना मॉडल को कितनी तेजी से अपनाती है।
फिलहाल इतना तय है कि बिहार में जनगणना का यह नया अंदाज भविष्य में स्मार्ट गवर्नेंस की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है।















