नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए यह साफ़ कर दिया कि सरकार की प्राथमिकताएँ अब केवल सड़क, बिजली और पूंजी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, ज्ञान-विज्ञान और महिला स्वावलंबन को भी शामिल किया जा रहा है। बजट भाषण में उन्होंने कई ऐसे एलान किए, जिनके दूरगामी सियासी और सामाजिक मायने निकाले जा रहे हैं।

मानसिक स्वास्थ्य में बड़ा कदम
वित्त मंत्री ने उत्तर भारत में मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की कमी पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने निमहांस-2 की स्थापना का एलान किया, जिसके लिए रांची और तेजपुर को चुना गया है। इसे स्वास्थ्य नीति में संतुलन साधने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, ताकि मानसिक स्वास्थ्य को उतनी ही अहमियत मिले जितनी शारीरिक बीमारियों को।

पूर्वी भारत में रचनात्मक और वैज्ञानिक निवेश
पूर्वी भारत के लिए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव पेश किया गया। इससे रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और औद्योगिक व शैक्षणिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही चार टेलिस्कोप इन्फ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटी की स्थापना का एलान किया गया, जिसे भारत की ज्ञान-विज्ञान में मजबूत उपस्थिति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
चिकित्सा पर्यटन और स्वास्थ्य क्षेत्र
स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार ने पाँच चिकित्सा पर्यटन केंद्र स्थापित करने और राज्यों को इसमें मदद देने की घोषणा की। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक मेडिकल हब के रूप में विकसित करना है।
महिला सशक्तिकरण
वित्त मंत्री ने SHE मार्ट्स की घोषणा कर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का संदेश दिया। इस योजना के तहत महिलाएं इन मार्ट्स की कप्तान होंगी और क्रेडिट-लिंक्ड मार्ट्स के ज़रिये अपनी आजीविका खड़ी कर सकेंगी।
आयुष और पारंपरिक चिकित्सा का विकास
निर्मला सीतारमण ने तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने, आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को उन्नत करने तथा जामनगर में WHO के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र को अपग्रेड करने का प्रस्ताव पेश किया। इसका मकसद पारंपरिक चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की वैश्विक साख को मजबूत करना है।

















