• Home
  • Blog
  • शराब पर सियासत गरम, तेज प्रताप यादव ने अयोध्या–वृंदावन को लेकर छेड़ी नई बहस
Image

शराब पर सियासत गरम, तेज प्रताप यादव ने अयोध्या–वृंदावन को लेकर छेड़ी नई बहस

लखनऊ/पटना। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान लगातार चढ़ता जा रहा है। अब यह राजनीति विकास या कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर नॉनवेज और शराब जैसे संवेदनशील मुद्दों तक पहुंच गई है। इसी सियासी महामंथन में बिहार के पूर्व मंत्री और जेजेडी नेता तेज प्रताप यादव भी कूद पड़े हैं। यूपी के बदलते राजनीतिक माहौल के बीच तेज प्रताप यादव का एक बयान सामने आया है, जिसने आस्था और राजनीति को एक बार फिर आमने-सामने ला खड़ा किया है।

तेज प्रताप यादव ने अयोध्या में मांस बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध का खुलकर स्वागत किया है। उन्होंने इसे एक सही और आवश्यक कदम बताते हुए कहा कि अयोध्या जैसे पवित्र धार्मिक स्थल की मर्यादा बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि, इसी के साथ उन्होंने एक तीखा सवाल भी दाग दिया। तेज प्रताप यादव ने पूछा कि अगर अयोध्या के 15 किलोमीटर के दायरे में नॉनवेज की बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है, तो फिर वृंदावन को इससे बाहर क्यों रखा गया है?

तेज प्रताप यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की नगरी वृंदावन में खुलेआम शराब की दुकानें और नॉनवेज की बिक्री श्रद्धालुओं की आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ धार्मिक मर्यादा की बात की जाती है, वहीं दूसरी तरफ कुछ तीर्थ स्थलों को राजनीतिक सहूलियत के हिसाब से छूट दी जाती है, जो सही नहीं है।

उन्होंने साफ तौर पर मांग की कि अयोध्या ही नहीं, बल्कि काशी, मथुरा और वृंदावन जैसे सभी प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थलों पर मांस और मदिरा की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होनी चाहिए। तेज प्रताप यादव के अनुसार, ये स्थान सिर्फ भौगोलिक सीमाएं नहीं हैं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं, जहां समान नियम और समान मर्यादा लागू होनी चाहिए।

तेज प्रताप यादव ने कहा कि अगर एक तीर्थ स्थल पर सख्त प्रतिबंध और दूसरे पर छूट दी जाती है, तो यह दोहरे मापदंड की राजनीति कहलाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे फैसले आस्था की रक्षा के लिए होने चाहिए, न कि चुनावी फायदे और नुकसान को ध्यान में रखकर। उनका मानना है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

राम मंदिर जाने से कतराने वाले विपक्षी नेताओं को लेकर पूछे गए सवाल पर तेज प्रताप यादव ने संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आस्था पूरी तरह व्यक्तिगत विषय है। जिसके दिल में सच्ची श्रद्धा होगी, वह मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करेगा। भक्ति और विश्वास के मामलों में किसी तरह का राजनीतिक दबाव या दिखावा नहीं होना चाहिए।

बहरहाल, तेज प्रताप यादव का यह बयान यूपी चुनाव से पहले धार्मिक मुद्दों पर चल रही सियासी बहस में नया रंग घोलता नजर आ रहा है। नॉनवेज, शराब, तीर्थ स्थल और आस्था जैसे मुद्दे एक बार फिर चुनावी राजनीति के केंद्र में आते दिख रहे हैं, जहां मर्यादा, विश्वास और सियासत एक ही मंच पर आमने-सामने खड़ी नजर आ रही हैं।

Releated Posts

शिक्षक के साथ छात्रा लापता, चार महीने से जारी तलाश, मामला बना चर्चा का विषय

दरभंगा जिले के गौराबौराम क्षेत्र से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसमें एक सरकारी स्कूल के शिक्षक…

ByByAjay Shastri Apr 30, 2026

बेटे की हत्या मामले में पिता को आजीवन कारावास, बेगूसराय कोर्ट का फैसला

बेगूसराय जिला अदालत ने बेटे की हत्या के एक मामले में आरोपी पिता को आजीवन कारावास की सजा…

ByByAjay Shastri Apr 30, 2026

सुल्तानगंज कांड: ऑफिस में गोली, जंगल में एनकाउंटर… ऐसे खत्म हुआ रामधनी यादव

भागलपुर के सुल्तानगंज से उठी गोलियों की आवाज अब सिर्फ एक वारदात नहीं रही… यह एक पूरी कहानी…

ByByAjay Shastri Apr 29, 2026

बेगूसराय में जनगणना 2027 की तैयारी तेज, DM श्रीकांत शास्त्री के निर्देश पर चल रहा विशेष प्रशिक्षण

प्रखंडों से लेकर शहरी निकायों तक प्रशिक्षण सत्र आयोजित, दो चरणों में होगा जनगणना कार्य जिला पदाधिकारी, बेगूसराय…

ByByAjay Shastri Apr 29, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top