बेतिया (पश्चिम चम्पारण)।
नगर निगम में विकास के नाम पर चल रहे काले खेल का बड़ा खुलासा सामने आया है। पश्चिम चम्पारण जिले के बेतिया नगर निगम में करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं के आवंटन में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किए जाने का आरोप लगा है। इस गंभीर मामले का खुलासा खुद नगर निगम की महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने किया है, जिससे निगम प्रशासन से लेकर बैंकिंग व्यवस्था तक सवालों के घेरे में आ गई है।
विश्वस्त आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने इस पूरे मामले को लेकर नगर आयुक्त लक्ष्मण तिवारी को एक सख्त पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने बताया है कि नगर निगम की विभिन्न विकास योजनाओं के तहत संवेदकों (ठेकेदारों) को नियमों के अनुसार बैंक गारंटी के रूप में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के मूल कागजात जमा करने होते हैं। लेकिन जांच में यह सामने आया है कि कई संवेदकों ने असली एफडी के बजाय फर्जी बैंक एफडी के कागजात निगम कार्यालय में जमा कराए और इसी आधार पर करोड़ों रुपये की योजनाओं का ठेका हासिल कर लिया।
महापौर ने अपने पत्र में इसे गंभीर आर्थिक अपराध करार देते हुए कहा है कि यह सिर्फ नगर निगम के साथ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि जनता के पैसे और राष्ट्रीय हित के साथ भी गद्दारी है। उन्होंने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी संवेदकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
इस घोटाले में एक और चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया, जब यह पता चला कि कुछ बैंकों की ओर से इन फर्जी एफडी के सत्यापन प्रमाण पत्र भी नगर निगम को उपलब्ध कराए गए हैं। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि मामला केवल संवेदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बैंक स्तर पर भी मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। महापौर ने इसे महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित आर्थिक अपराध बताया है।
महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने बीते पांच वर्षों के दौरान नगर निगम में विकास योजनाओं के तहत जमा कराई गई सभी बैंक एफडी की संबंधित बैंकों से गहन जांच कराने का आदेश दिया है। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जांच पूरी होने तक किसी भी संवेदक की बैंक गारंटी या एफडी की वापसी नहीं की जाएगी। इसके अलावा बैंकों से प्राप्त जांच रिपोर्ट की प्रतियां और अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत अद्यतन प्रतिवेदन भी महापौर को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
इस मामले के सामने आने के बाद नगर निगम के भीतर हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक हलकों में इसे अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के दौरान कितने संवेदकों की भूमिका उजागर होती है, किन-किन बैंकों की संलिप्तता सामने आती है और नगर निगम प्रशासन इस घोटाले पर कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।
स्पष्ट है कि इस प्रकरण ने बेतिया नगर निगम में विकास कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में सामने आएगा।
















