बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में मंगलवार शाम उस वक्त सनसनी फैल गई, जब नगर परिषद कार्यालय के भीतर घुसकर बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस हमले में कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नकाबपोश हमलावर अचानक कार्यालय में घुसे और सीधे अधिकारियों को निशाना बनाते हुए कई राउंड गोलियां चलाईं। कुछ ही पलों में दफ्तर का माहौल अफरा-तफरी में बदल गया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे।
पुलिस ने इस मामले में तेजी दिखाते हुए कार्रवाई शुरू की और करीब 12 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी रामधनी यादव तक पहुंच बनाई। बुधवार सुबह छापेमारी के दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।
इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मुठभेड़ में रामधनी यादव को मार गिराया। इस एनकाउंटर के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई, वहीं पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
इस घटना के बाद सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। नीरज कुमार ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि बिहार में कानून का राज है और पुलिस पर हमला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं विपक्ष ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इस घटना को गंभीर विफलता बताया है।
पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर बहस छेड़ दी है। दिनदहाड़े सरकारी कार्यालय में हुई इस वारदात और उसके बाद हुए एनकाउंटर ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार में अपराध के खिलाफ सख्त नीति अब जमीन पर दिखने लगी है या यह केवल तात्कालिक कार्रवाई भर है।


















