मोतिहारी। बिहार पुलिस ने अपराध की अंडरवर्ल्ड पर करारी चोट करते हुए जाली नोटों के एक बड़े रैकेट का पर्दाफ़ाश किया है। यह कार्रवाई किसी फ़िल्मी पटकथा से कम नहीं रही, जहां लंबे समय से छुपा नक़ली करेंसी का धंधा एक झटके में बेनक़ाब हो गया।
हरैया थाना पुलिस ने अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर करीब 25 लाख रुपये की जाली मुद्रा, एक चार पहिया वाहन और कई अहम सबूत ज़ब्त किए हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह गिरोह बेहद शातिर तरीक़े से जाली नोट छापकर बिहार ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों तक सप्लाई करता था। नक़ली नोटों की यह फैक्ट्री पूरी तरह संगठित अपराध के तौर पर काम कर रही थी। इसमें हर सदस्य की भूमिका पहले से तय थी—कोई छपाई करता था, कोई सप्लाई संभालता था और कोई बाज़ार में खपाने का काम करता था।
इस बड़ी कामयाबी के पीछे एसपी स्वर्ण प्रभात के सख़्त निर्देश बताए जा रहे हैं। उनके आदेश पर रक्सौल डीएसपी के नेतृत्व में हरैया थाना पुलिस ने ऑपरेशन को अंजाम दिया। गुप्त सूचना के आधार पर पहले जाल बिछाया गया और फिर एक-एक कर अपराधियों के ठिकानों पर दबिश दी गई।
छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में जाली नोट बरामद हुए, जिनकी छपाई इतनी साफ़ और वास्तविक जैसी थी कि पहली नज़र में असली और नक़ली नोट का फ़र्क़ कर पाना मुश्किल था।
पुलिस सूत्रों की मानें तो अब तक 10 शातिर अपराधियों को गिरफ़्तार किया गया है। सभी से गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि इस नेटवर्क के पीछे छिपे मास्टरमाइंड और अन्य कड़ियों तक पहुंचा जा सके। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि यह रैकेट किन-किन राज्यों से जुड़ा है और अब तक कितनी बड़ी मात्रा में जाली नोट बाज़ार में खपाए जा चुके हैं।
इस खुलासे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। आम लोग राहत की सांस ले रहे हैं, वहीं अपराध की दुनिया में खौफ़ का माहौल बन गया है। पुलिस का कहना है कि यह तो सिर्फ़ शुरुआत है। नक़ली नोट के इस काले कारोबार में शामिल किसी भी गुनहगार को बख़्शा नहीं जाएगा।
खाकी ने साफ़ कर दिया है कि अपराध चाहे जितना शातिर हो, क़ानून के हाथ उससे कहीं ज़्यादा लंबे हैं।


















