क्या आपने कभी सोचा है कि एक सेब की कीमत इतनी हो सकती है कि आम आदमी के पसीने छूट जाएं? न्यूजीलैंड से सीधे Patna पहुंचा ‘रॉकेट सेब’ इन दिनों शहर के पॉश इलाकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्लास्टिक के खास ट्यूब में बिकने वाले इस छोटे से सेब के दीवाने बड़े-बड़े IAS-IPS अधिकारी और सूबे के मंत्री बताए जा रहे हैं। आखिर इस सेब में ऐसा क्या जादू है कि लोग मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं? आइए जानते हैं पूरी कहानी।
कहां बिक रहा है यह ‘रॉकेट’?
यह खास सेब पटना के इनकम टैक्स गोलंबर के पास स्थित फल बाजार में बिक रहा है। ‘रॉकेट सेब’ के नाम से मशहूर यह प्रीमियम फल आम ग्राहकों की पहुंच से बाहर माना जा रहा है। ऊंची कीमत और आकर्षक पैकेजिंग के कारण यह खासतौर पर संपन्न वर्ग की पसंद बनता जा रहा है।
बाजार के दुकानदारों के अनुसार यह सेब सीधे न्यूजीलैंड से आयात होकर दिल्ली या कोलकाता के रास्ते पटना पहुंचता है।
कितनी है कीमत?
- आधा किलो पैक में सिर्फ 5 सेब
- कीमत करीब 400 रुपये
- यानी एक सेब लगभग 80 रुपये का
- एक किलो में करीब 10 सेब
दुकानदारों का कहना है कि इसकी मांग सीमित है और दिनभर में मुश्किल से 2-3 डिब्बे ही बिक पाते हैं।
आखिर क्या है खासियत?
‘रॉकेट सेब’ आकार में गोल्फ बॉल जितना छोटा होता है, लेकिन स्वाद और पोषण के मामले में बड़े सेबों से कम नहीं है।
- स्वाद: मीठा, हल्का खट्टापन
- बनावट: कुरकुरी और रसदार
- उपयोग: पॉकेट-साइज हेल्दी स्नैक
- बच्चों और युवाओं में खासा लोकप्रिय
छोटे आकार की वजह से इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।
कहां होता है उत्पादन?
इस मिनी सेब का मुख्य उत्पादन न्यूजीलैंड के Hawke’s Bay क्षेत्र में होता है, जो सेब की खेती के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है।
इसका व्यापारिक संचालन Rockit Global Limited द्वारा किया जाता है। कंपनी इसे दुनिया का पहला मिनी सेब बताती है, जिसे लगभग 20 वर्षों के शोध के बाद विकसित किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका सबसे बड़ा उपभोक्ता देश चीन माना जाता है।
क्यों है इतना महंगा?
- यूनिक मिनी साइज
- प्रीमियम ब्रांडिंग
- पारदर्शी ट्यूब पैकेजिंग
- सीमित आयात
- हाई-प्रोफाइल ग्राहक वर्ग
यही कारण है कि यह सेब आम फल से अलग एक लग्जरी प्रोडक्ट की पहचान बना चुका है।
‘रॉकेट सेब’ सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि प्रीमियम लाइफस्टाइल का प्रतीक बनता जा रहा है। जहां एक ओर आम लोग पारंपरिक सेब खरीद रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह मिनी सेब खास वर्ग के बीच स्टेटस सिंबल बनता दिख रहा है।
अब देखना यह है कि यह ट्रेंड कब तक कायम रहता है और क्या भविष्य में यह आम लोगों की पहुंच में भी आएगा या नहीं।




















