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बढ़ता खतरा: तनाव के कारण भारत में 4 करोड़ बच्चों पर मोटापे का साया

आज के समय में तनाव केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर बच्चों के स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव बच्चों में बढ़ते मोटापे का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। पढ़ाई का बढ़ता दबाव, स्क्रीन टाइम में वृद्धि और शारीरिक गतिविधियों की कमी बच्चों की जीवनशैली को प्रभावित कर रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार जब बच्चे तनाव में होते हैं तो शरीर में Cortisol नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है और शरीर में वसा (फैट) के जमाव को बढ़ा सकता है। इसके कारण बच्चों में वजन बढ़ने की समस्या देखने को मिल रही है।

पढ़ाई का दबाव और बदलती खानपान की आदतें

आजकल बच्चों पर पढ़ाई और प्रतियोगिता का दबाव काफी बढ़ गया है। लंबे समय तक बैठकर पढ़ाई करना, मोबाइल और कंप्यूटर पर अधिक समय बिताना तथा बाहर खेलकूद की कमी उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। इसके साथ ही तनाव की स्थिति में बच्चे अक्सर जंक फूड और मीठे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने लगते हैं, जिससे मोटापे का खतरा और बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को तनाव से दूर रखने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की जरूरत है। इसके लिए

  • बच्चों को रोजाना कम से कम एक घंटे शारीरिक गतिविधि या खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • संतुलित और पौष्टिक आहार देना चाहिए।
  • स्क्रीन टाइम को सीमित करना चाहिए।
  • माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताकर उनकी मानसिक स्थिति को समझना चाहिए।

यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो बचपन में बढ़ता मोटापा आगे चलकर कई बीमारियों का कारण बन सकता है।

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