बिहार में हर साल हजारों बच्चों के लापता होने का चौंकाने वाला मामला सामने आ रहा है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने बताया कि बिहार में हर साल करीब 15 हजार बच्चे गायब हो जाते हैं, जिनमें से लगभग 5 से 6 हजार बच्चों का सुराग पुलिस को भी नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा कि मानव तस्करी को लेकर बिहार पुलिस बेहद गंभीर है और इस पर रोक लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।
दरअसल राज्य में मानव तस्करी से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसको लेकर पुलिस के साथ-साथ कई सामाजिक संगठन भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। DGP विनय कुमार ने बताया कि कई मामलों में ऑर्केस्ट्रा ग्रुप के नाम पर नाबालिग लड़कियों को काम पर लगाया जाता है, जहां उनका शोषण किया जाता है।
उन्होंने बताया कि कई बार नेपाल से भी लड़कियों को लाकर अवैध गतिविधियों में धकेलने के मामले सामने आए हैं। गरीबी और शिक्षा की कमी के कारण लोग आसानी से ऐसे गिरोहों के जाल में फंस जाते हैं। यह एक संगठित अपराध है, जिसके जरिए अपराधी गिरोह आर्थिक गतिविधियां चलाते हैं।
DGP ने यह भी बताया कि इन दिनों साइबर स्लेवरी गैंग भी सक्रिय हो गए हैं। ये गिरोह लोगों को विदेश में अच्छी नौकरी का लालच देकर उनका पासपोर्ट बनवाते हैं और फिर उन्हें दूसरे देशों में ले जाकर जबरन काम करवाते हैं। हालांकि पुलिस अब तक सैकड़ों लोगों को ऐसे गिरोहों के चंगुल से छुड़ा चुकी है।
उन्होंने बताया कि कई मामलों में संतानहीन दंपत्ति अवैध तरीके से बच्चों की खरीद-फरोख्त कर अपनी संतान की इच्छा पूरी करने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा बाल मजदूरी के मामले भी लंबे समय से सामने आते रहे हैं।
पुलिस दूसरे राज्यों में ले जाए गए बच्चों को भी रेस्क्यू कर वापस ला रही है। DGP के अनुसार बिहार सरकार इस गंभीर समस्या को लेकर काफी सजग है और कई गैर सरकारी संगठन (NGO) भी इस दिशा में काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जो भी बच्चा रेस्क्यू किया जाता है, उसे सरकारी योजनाओं से जोड़ने की कोशिश की जाती है, ताकि आर्थिक तंगी के कारण वह दोबारा बाल मजदूरी या मानव तस्करी के जाल में न फंसे।













