भारत में रसोई गैस की कमी की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा बयान दिया है। सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और गैस की आपूर्ति में किसी तरह की कमी नहीं है। लोगों से अपील की गई है कि वे घबराकर या पैनिक में गैस सिलेंडर बुक न करें।
हालांकि दूसरी ओर सरकार ने गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में लगातार बदलाव भी किए हैं। पिछले छह दिनों में तीन बार नियम बदले जा चुके हैं। अब एक बार फिर नया नियम लागू करते हुए सरकार ने सिलेंडर बुकिंग के बीच अंतराल बढ़ा दिया है।
ग्रामीण और शहरी इलाकों के लिए अलग नियम
नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग बुकिंग अंतराल तय किया गया है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में: एक सिलेंडर लेने के बाद अगली बुकिंग 45 दिन बाद ही की जा सकेगी।
- शहरी क्षेत्रों में: अगला सिलेंडर 25 दिन बाद बुक किया जा सकेगा।
इससे पहले पूरे देश में सिलेंडर बुकिंग के बीच 21 दिन का अंतराल था, जिसे हाल ही में बढ़ाकर 25 दिन किया गया था।
अफवाहों के कारण बढ़ी बुकिंग
सरकार के मुताबिक हाल के दिनों में गैस की कमी की अफवाहों के कारण लोगों ने जरूरत से पहले ही सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिया था।
रिपोर्ट के अनुसार जो ग्राहक पहले औसतन 55 दिनों में सिलेंडर बुक करते थे, वे अचानक 15–15 दिन के अंतराल पर बुकिंग कराने लगे। इससे जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंका बढ़ गई थी। इसी स्थिति को नियंत्रित करने और सप्लाई सिस्टम पर दबाव कम करने के लिए बुकिंग अंतराल बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
मिडिल ईस्ट तनाव का भी असर
दरअसल ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण मध्य एशिया के अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा बढ़ गया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में से एक माना जाता है।
भारत अपनी करीब 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरत आयात से पूरी करता है और इसमें से लगभग 90 प्रतिशत गैस इसी रास्ते से आती है। ऐसे में अगर इस मार्ग पर सप्लाई प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार और रसोई गैस पर पड़ सकता है।
सरकार का दावा – गैस की कोई कमी नहीं
हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि फिलहाल देश में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर सिलेंडर बुक न करें।
सरकार के अनुसार घरेलू रिफाइनरी कंपनियों ने एलपीजी उत्पादन 25 से 28 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा भारत ने कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोतों से भी व्यवस्था कर ली है।
घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगी प्राथमिकता
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि सप्लाई पर दबाव बढ़ता है तो घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों को मिलने वाली एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति में कुछ कटौती की गई है।
इस कदम का उद्देश्य देश के 33 करोड़ से अधिक घरों तक रसोई गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार भारत में रोजाना करीब 50 लाख एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी होती है। देशभर में लगभग एक लाख पेट्रोल पंप और गैस वितरण केंद्र सक्रिय हैं और फिलहाल कहीं भी स्टॉक खत्म होने की स्थिति नहीं है।
सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।













