बिहार प्रशासन में पारदर्शिता को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए गृह विभाग ने उन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, जिन्होंने अब तक अपनी चल-अचल संपत्ति और दायित्वों की विवरणी जमा नहीं की है। गृह विभाग के संयुक्त सचिव नवीन चन्द्र द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट कर दिया गया है कि सरकार अब ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में नहीं है और नियमों की अनदेखी करने वालों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी।
जारी निर्देश के अनुसार, कई बार आदेश देने के बावजूद बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी अपनी संपत्ति का ब्योरा देने में विफल रहे हैं। इसे अनुशासनहीनता मानते हुए सरकार ने अब कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में पुलिस महानिदेशक (DGP), आईजी (कारा) और अपराध अनुसंधान विभाग (CID) समेत कई विभागों को पत्र भेजकर डिफॉल्टर अधिकारियों की सूची सौंप दी गई है।
गौरतलब है कि सभी अधिकारियों को 31 दिसंबर 2025 तक अपनी संपत्ति का पूरा विवरण देना अनिवार्य किया गया था, लेकिन निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी कई लोगों ने जानकारी नहीं दी। ऐसे में अब इन अधिकारियों पर विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।
सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश का हवाला देते हुए गृह विभाग ने साफ कहा है कि निर्देशों का पालन नहीं करना सेवा शर्तों का उल्लंघन है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो अधिकारी संपत्ति घोषित करने में लापरवाही बरत रहे हैं, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सरकार ने इस कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए आईटी प्रबंधक को भी पत्र की प्रति भेजी है, ताकि तकनीकी स्तर पर निगरानी को मजबूत किया जा सके। अब डिजिटल माध्यम से भी ऐसे अधिकारियों पर नजर रखी जाएगी।
सरकार के इस सख्त रुख से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। स्पष्ट संकेत है कि अब नियमों की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
















