नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने Information Technology Rules 2021 में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन कंटेंट पर निगरानी का दायरा और व्यापक हो सकता है।
इस प्रस्ताव के तहत मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) प्लेटफॉर्म्स के लिए सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना और अधिक अनिवार्य बनाया जाएगा। साथ ही, ऑनलाइन कंटेंट—खासतौर पर न्यूज और करंट अफेयर्स—को रेगुलेट करने के दायरे को भी बढ़ाने की बात कही गई है।
सरकार ने इस ड्राफ्ट पर हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं, जिसके लिए 14 अप्रैल 2026 तक की समय सीमा तय की गई है।
प्रस्तावित संशोधनों में IT नियमों के भाग III को उन प्लेटफॉर्म्स पर भी लागू करने का प्रावधान शामिल है, जो ऐसे यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई न्यूज सामग्री को होस्ट करते हैं, जो खुद रजिस्टर्ड पब्लिशर नहीं हैं। इसका मतलब है कि अब आम यूजर्स द्वारा शेयर की गई खबरें भी नियामक दायरे में आ सकती हैं।
ड्राफ्ट के अनुसार, यह नियम उन सभी कंटेंट पर लागू होगा जिसे यूजर्स द्वारा प्लेटफॉर्म पर अपलोड, शेयर, स्टोर, प्रकाशित या संशोधित किया जाता है।
इसके अलावा, एक नया नियम 3(4) जोड़ने का प्रस्ताव है, जो इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत अपने “ड्यू डिलिजेंस” दायित्वों के तहत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों, SOPs और सलाहों का पालन करना अनिवार्य करेगा।
ड्राफ्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि डेटा संरक्षण से जुड़े नियम अन्य लागू कानूनों के साथ प्रभावी रहेंगे और उन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
सबसे अहम बदलावों में से एक यह है कि नियम 14 के तहत बनी अंतर-विभागीय समिति के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। अब यह समिति न सिर्फ शिकायतों पर कार्रवाई करेगी, बल्कि उन मामलों पर भी विचार कर सकेगी जिन्हें सीधे मंत्रालय द्वारा उसके पास भेजा जाएगा।
इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकारी निगरानी की भूमिका और मजबूत होने की संभावना है।


















