राजधानी पटना में अब कचरा फेंकने का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। Patna Municipal Corporation ने केंद्र सरकार के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत 1 अप्रैल से नए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। इन नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
नए नियम के अनुसार अब हर घर, दुकान, संस्थान और प्रतिष्ठान को अपने परिसर में ही कचरे की छंटनी करना अनिवार्य होगा। शहर में अब मिक्स कचरा देने की अनुमति नहीं होगी। हर नागरिक को कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटना होगा—
- गीला कचरा
- सूखा कचरा
- सैनिटरी कचरा
- विशेष देखभाल वाला कचरा
निगम की कचरा गाड़ियों में भी चार रंग के अलग-अलग डिब्बे लगाए गए हैं—हरा (गीला), नीला (सूखा), लाल (सैनिटरी) और काला (विशेष कचरा)। अगर कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करते हुए मिलावटी कचरा देगा, तो सफाईकर्मी उसे लेने से मना कर सकते हैं।
सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने, जलाने या नालियों में डालने वालों पर निगम की कड़ी नजर रहेगी। ऐसे मामलों में जुर्माना भी लगाया जाएगा। यह नियम सड़क किनारे ठेला लगाने वाले वेंडर्स पर भी लागू होगा। उन्हें अपने स्टॉल पर गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखना होगा और कचरा केवल निगम की गाड़ियों या तय डिपो में ही देना होगा।
बड़े संस्थानों के लिए नियम और भी सख्त किए गए हैं। जो होटल, अस्पताल, मॉल या अपार्टमेंट रोजाना 100 किलो से ज्यादा कचरा उत्पन्न करते हैं, उन्हें ‘थोक कचरा उत्पादक’ की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे संस्थानों को निगम के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा और गीले कचरे का निपटान अपने परिसर में ही करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, 100 से ज्यादा लोगों के आयोजनों के लिए आयोजकों को पहले से निगम को सूचना देनी होगी और कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी भी खुद उठानी होगी।
कुल मिलाकर, पटना में अब कचरा प्रबंधन को पूरी तरह व्यवस्थित और सख्त बनाया जा रहा है। नियमों का पालन करने वालों को सुविधा मिलेगी, जबकि लापरवाही करने वालों पर निगम का डंडा चलेगा।















