बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने अपनी चयन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रोफेशनल बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब BPSC के इंटरव्यू पहले से ज्यादा सख्त और उच्च मानकों पर आधारित होंगे, जिससे योग्य और सक्षम अभ्यर्थियों का चयन सुनिश्चित किया जा सके।
इंटरव्यू पैनल में IAS-IPS अधिकारियों की एंट्री
नई व्यवस्था के तहत अब इंटरव्यू बोर्ड में केवल शिक्षाविद और विषय विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। हर पैनल में कम से कम एक IAS या IPS अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है।
UPSC की तर्ज पर होगा मूल्यांकन
इस बदलाव के बाद BPSC इंटरव्यू अब किसी यूनिवर्सिटी वाइवा की तरह नहीं, बल्कि UPSC के इंटरव्यू की तरह होगा। अभ्यर्थियों से केवल विषय आधारित प्रश्न ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की परिस्थितियों, केस स्टडी और प्रशासनिक चुनौतियों से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे।
सिर्फ ज्ञान नहीं, व्यक्तित्व का भी आकलन
फील्ड में तैनात अधिकारी अब अभ्यर्थियों की निर्णय लेने की क्षमता, मानसिक मजबूती, बॉडी लैंग्वेज, स्ट्रेस मैनेजमेंट और नैतिक मूल्यों का भी मूल्यांकन करेंगे। इससे चयन प्रक्रिया अधिक व्यापक और प्रभावी बनेगी।
70वीं CCE इंटरव्यू से लागू हुआ नया नियम
यह नई प्रणाली वर्तमान में चल रही 70वीं संयुक्त मुख्य परीक्षा (CCE) के इंटरव्यू से ही लागू कर दी गई है। साथ ही 71वीं मुख्य परीक्षा और 72वीं प्रारंभिक परीक्षा में भी यही पैटर्न जारी रहेगा।
पहले भी हुए कई बड़े बदलाव
BPSC ने 2023 से 2026 के बीच कई अहम सुधार किए हैं, जिनमें—
- इंटीग्रेटेड प्रीलिम्स की शुरुआत
- नेगेटिव मार्किंग लागू
- मुख्य परीक्षा में 300 अंकों का निबंध जोड़ा गया
- वैकल्पिक विषय (Optional) को केवल क्वालिफाइंग बनाया गया
अब वैकल्पिक विषय के अंक फाइनल मेरिट में नहीं जोड़े जाएंगे, जबकि सामान्य अध्ययन (GS) और निबंध ही चयन का मुख्य आधार होंगे।
पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर
इंटरव्यू पैनल में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी से पक्षपात और बाहरी हस्तक्षेप की संभावना कम होगी। इससे खासकर ग्रामीण और साधारण पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को अधिक अवसर मिलने की उम्मीद है।
यह बदलाव BPSC की चयन प्रक्रिया को और अधिक विश्वसनीय, निष्पक्ष और मेरिट आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
















