नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। यूपी एसटीएफ और नोएडा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस मामले के मुख्य आरोपी आदित्य आनंद को तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस के अनुसार, 28 वर्षीय आदित्य आनंद इस हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता था। वह मूल रूप से हाजीपुर (जिला वैशाली, बिहार) का रहने वाला है और नोएडा के सेक्टर-37 स्थित अरुण विहार में रह रहा था। उसकी पहचान एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में भी सामने आई है।
जांच में पता चला है कि आदित्य आनंद ने वर्ष 2020 में एनआईटी जमशेदपुर से बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद कैंपस प्लेसमेंट के जरिए उसे एक निजी कंपनी में नौकरी मिली, जहां वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर कार्यरत था। बाद में वह “मजदूर बिगुल” नामक संगठन से जुड़ गया और श्रमिक आंदोलनों में सक्रिय हो गया।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में आदित्य आनंद पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। उससे पहले उसके दो सहयोगियों—रूपेश रॉय और मनीषा चौहान—को गिरफ्तार किया जा चुका है। मनीषा गोपालगंज और रूपेश छपरा का निवासी बताया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, 13 अप्रैल को हुई हिंसा से पहले 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच आदित्य आनंद ने कई गुप्त बैठकों का आयोजन किया था। इन बैठकों में आंदोलन को उग्र बनाने और हिंसा भड़काने की रणनीति तैयार की गई थी। इसके बाद प्रदर्शन के दौरान स्थिति बेकाबू हो गई और कई फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ तथा वाहनों में आगजनी की घटनाएं सामने आईं।
पुलिस का यह भी कहना है कि आदित्य आनंद ने श्रमिकों को संबोधित करते हुए भाषण दिया था। उसके फोटो और वीडियो सामने आने के बाद ही जांच में उसकी भूमिका स्पष्ट हुई। तकनीकी निगरानी के जरिए उसकी लोकेशन ट्रैक की गई और अंततः उसे तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया गया।
गौरतलब है कि नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में यह आंदोलन शुरुआत में वेतन वृद्धि, छंटनी रोकने और कार्य परिस्थितियों में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन बाद में यह हिंसक हो गया। इस दौरान भारी नुकसान हुआ और कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए।
फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश जारी है।















