बेगूसराय से परीक्षा प्रणाली को चुनौती देने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर संगठित तरीके से नकल कराई जा रही थी। पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया और पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
मामला शनिवार का है, जब सीताराम राय प्लस टू विद्यालय स्थित परीक्षा केंद्र पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को पहले ही मिल चुकी थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने केंद्र के आसपास सादे कपड़ों में निगरानी शुरू कर दी। परीक्षा के दौरान एक परीक्षार्थी, अभिषेक रंजन, की हरकतों ने पुलिस का ध्यान खींचा—वह बार-बार अपने कान को छू रहा था और असामान्य व्यवहार कर रहा था।

शक गहराने पर जब उसकी सघन जांच की गई, तो उसके कान के अंदर बेहद छोटे आकार का ब्लूटूथ डिवाइस छिपा हुआ मिला। यह देखकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। पूछताछ में अभिषेक ने खुलासा किया कि वह इस डिवाइस के जरिए बाहर बैठे लोगों से प्रश्नों के उत्तर सुन रहा था।
जांच आगे बढ़ने पर यह सामने आया कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का हिस्सा है। गिरोह के सदस्य परीक्षा केंद्र के बाहर से मोबाइल और अन्य उपकरणों के माध्यम से प्रश्नपत्र हल कर उत्तर परीक्षार्थी तक पहुंचा रहे थे। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस नेटवर्क से जुड़े चार अन्य युवकों को भी गिरफ्तार कर लिया, जो पूरे ऑपरेशन को संचालित कर रहे थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह का मकसद आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कर परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करना और अनुचित तरीके से सफलता दिलाना था। हालांकि, समय पर की गई कार्रवाई से बड़ी गड़बड़ी को टाल दिया गया। सभी गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें और कौन-कौन शामिल हैं।
इस घटना के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पूरी तरह अलर्ट हो गए हैं। सभी परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। साथ ही, चेकिंग प्रक्रिया को सख्त बनाते हुए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नकल के किसी भी प्रयास को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न कर सके।
अजय शास्त्री की रिपोर्ट





















