पटना सिटी में एक और हत्या ने कानून-व्यवस्था की हकीकत को फिर सामने ला दिया है। खुसरूपुर थाना क्षेत्र के कटौना गांव के पास बीती रात एक भोज के दौरान शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते खौफनाक हिंसा में बदल गया। आरोपियों ने अंकित कुमार नाम के युवक को घेरकर उस पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि भोज के दौरान किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जो कुछ ही देर में उग्र हो गई। गुस्से में बेकाबू हमलावरों ने अंकित पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। शरीर पर कई गहरे जख्म लगे और युवक ने वहीं दम तोड़ दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार ने पुष्टि की है कि हत्या चाकुओं से गोदकर की गई है। उन्होंने बताया कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीम बनाकर लगातार छापेमारी की जा रही है।
मगर सवाल वही है जो हर ऐसी घटना के बाद खड़ा होता है—क्या अपराध पर वास्तव में कोई लगाम है?
तीन दिन पहले ही पटना सिटी के बायपास थाना क्षेत्र में एक स्कूली छात्रा की हत्या का मामला सामने आया था, जिसमें अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। अब एक और हत्या ने लोगों के मन में डर को और गहरा कर दिया है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश साफ देखा जा रहा है। उनका कहना है कि अपराधी बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं, जबकि पुलिस की कार्रवाई घटनाओं के बाद तक ही सीमित नजर आती है।
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जो आम लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाती है। जब छोटी-छोटी बातों पर लोगों की जान चली जा रही हो और अपराधियों में कानून का डर नजर न आए, तो यह चिंता का विषय बनना लाज़िमी है।
फिलहाल पुलिस कार्रवाई की बात कर रही है, लेकिन इलाके के लोगों की नजर अब सिर्फ एक चीज पर है—क्या इस बार भी मामला ठंडा पड़ेगा या वाकई कोई सख्त कदम उठाया जाएगा?
















