सख्त निर्देश के बावजूद नीमा चांदपुरा थाना क्षेत्र में खुलेआम नियमों की धज्जियां, आम लोग परेशान, पुलिस पर मिलीभगत के आरोप
बेगूसराय जिले में एक ओर सरकार और पुलिस प्रशासन डीजे पर पूरी तरह प्रतिबंध के सख्त आदेश जारी कर खुद की पीठ थपथपा रहा है, वहीं दूसरी ओर नीमा चांदपुरा थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव में इन आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। हालात यह हैं कि देर रात तक डीजे की तेज आवाज से पूरा इलाका थर्रा उठता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मानो गहरी नींद में हैं।
स्थानीय लोगों की मानें तो इस बेकाबू शोर ने आम जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे, बुजुर्गों की नींद हराम है और मरीजों की परेशानी अलग बढ़ गई है। सवाल यह है कि जब नियम सबके लिए बराबर हैं, तो फिर यहां यह खुली छूट किसके इशारे पर मिल रही है?
सूत्रों की मानें तो बिना “मर्जी” के यहां कुछ भी संभव नहीं। इलाके में चर्चा है कि पुलिस की मौन सहमति के बिना इतनी खुली अवहेलना मुमकिन नहीं। अगर यह सच नहीं, तो फिर सख्त आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है?
यह समस्या सिर्फ नीमा चांदपुरा तक सीमित नहीं है। मार्केट क्षेत्र में भी डीजे के कारण जाम और अफरा-तफरी आम बात हो गई है। आम लोग रोज इस अव्यवस्था से जूझ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
नीमा चांदपुरा में अब कानून की नहीं, “डीजे की धुन” की चलती है… और प्रशासन उसी बीट पर खामोशी से झूम रहा है।
अब देखना यह है कि प्रशासन अपने ही आदेशों की इज्जत बचाता है या फिर डीजे की तेज आवाज में नियम-कानून हमेशा के लिए दबकर रह जाएंगे। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही किसी बड़े विवाद या हादसे को न्योता दे सकती है।
रिपोर्ट- अजय शास्त्री














