बिहार के बगहा में शुक्रवार को एएनएम स्कूल परिसर अचानक हिंसा का केंद्र बन गया। भोजन की खराब गुणवत्ता और दूषित पेयजल को लेकर चल रहा छात्राओं का विरोध इतना उग्र हो गया कि छात्राओं और जीविका दीदियों के बीच जमकर मारपीट और पथराव शुरू हो गया। देखते ही देखते पूरा स्कूल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।
घटना बगहा स्थित एएनएम स्कूल की है, जहां छात्राएं पिछले कई दिनों से हॉस्टल में मिलने वाले घटिया भोजन और बदबूदार पानी को लेकर नाराज थीं। छात्राओं का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे उनका गुस्सा लगातार बढ़ता गया।
शुक्रवार को छात्राएं हॉस्टल गेट के सामने तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रही थीं और थाली-बर्तन बजाकर विरोध जता रही थीं। इसी दौरान करीब 200 की संख्या में जीविका दीदियां स्कूल परिसर पहुंच गईं। दोनों पक्षों के आमने-सामने आते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच केवल बहस और नारेबाजी हुई, लेकिन कुछ ही देर में विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों तरफ से धक्का-मुक्की शुरू हुई और फिर चप्पल, बोतलें तथा ईंट-पत्थर चलने लगे। अचानक हुए पथराव से पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई और छात्राएं जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगीं।
इस हिंसक घटना में एक छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि कई अन्य छात्राओं को भी चोटें आई हैं। सभी घायलों को तत्काल बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही स्कूल प्राचार्य श्रीश वर्मा ने नगर थाना पुलिस को जानकारी दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रण में किया। हालांकि तब तक परिसर में काफी नुकसान हो चुका था और तनाव का माहौल बना रहा।
जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सोहेल राज ने कहा कि छात्राओं की शिकायतों की जांच की जा रही है और दोषियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
वहीं जीविका दीदियों ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। रूबी कुमारी ने दावा किया कि मेस में चिकन को लेकर पहले विवाद हुआ था, जिसके बाद तनाव बढ़ता गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा माहौल को जानबूझकर भड़काया गया।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और एएनएम स्कूल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। यह घटना छात्रावास प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है कि आखिर छोटी शिकायतें इतनी बड़ी हिंसा में कैसे बदल गईं।














