नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय के पांच नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के साथ देश की सर्वोच्च अदालत की न्यायिक क्षमता और मजबूत हुई है।
शपथ लेने वाले नए न्यायाधीशों में शील नागू, श्री चंद्रशेखर, संजीव सचदेवा, अरुण पल्ली और वी मोहना शामिल हैं। इन सभी ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अपनी नई जिम्मेदारियों का कार्यभार संभाल लिया है।
वी मोहना की नियुक्ति बनी चर्चा का विषय
इन नियुक्तियों की सबसे खास बात वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहना की सीधी नियुक्ति रही है। आमतौर पर उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों या वरिष्ठ न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया जाता है, लेकिन वी मोहना को सीधे बार से बेंच पर नियुक्त किया गया है। न्यायिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ कदम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की संख्या बढ़कर 37
पांच नए न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण के बाद सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है। हाल ही में केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। नई नियुक्तियां उसी फैसले के तहत की गई हैं।
महिला प्रतिनिधित्व को मिला बल
वी मोहना के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद शीर्ष अदालत में महिला न्यायाधीशों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। अगस्त 2021 के बाद पहली बार किसी महिला को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इसे न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लंबित मामलों के निपटारे में मिलेगी मदद
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नए न्यायाधीशों के शामिल होने से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और सर्वोच्च न्यायालय की कार्यक्षमता मजबूत होगी। बढ़ते मामलों के बोझ को कम करने और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में इन नियुक्तियों की अहम भूमिका रहेगी।
देश की सर्वोच्च अदालत में हुआ यह विस्तार न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में न्याय वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी तथा समावेशी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।















