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पटना में हर तीसरी हत्या की वजह बन रहा जमीन विवाद, पांच साल में 417 लोगों की गई जान

पटना। बिहार की राजधानी पटना में जमीन विवाद अब सामाजिक तनाव का नहीं, बल्कि जानलेवा संघर्ष का बड़ा कारण बनता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिले में होने वाली लगभग हर तीसरी हत्या के पीछे जमीन बंटवारा, कब्जा, रास्ते या पुश्तैनी संपत्ति का विवाद सामने आ रहा है। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि बढ़ती जमीन की कीमतों और संपत्ति को लेकर बढ़ते विवादों ने कई परिवारों को खून-खराबे की राह पर ला खड़ा किया है।

पिछले पांच वर्षों के पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच पटना जिले में कुल 1,251 हत्या के मामले दर्ज किए गए। इनमें से 417 हत्याएं सीधे तौर पर भूमि विवाद से जुड़ी थीं। यानी कुल हत्याओं में करीब 33 प्रतिशत मामलों की वजह जमीन संबंधी विवाद रहे।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में भूमि विवाद के कारण 48 लोगों की हत्या हुई थी। वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 55 हो गई। वर्ष 2023 में 70, वर्ष 2024 में 88 और वर्ष 2025 में अब तक 67 लोगों की जान जमीन विवाद में जा चुकी है। पिछले पांच वर्षों में ऐसे मामलों में 33.33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

गांवों में ज्यादा खूनी हो रहे जमीन विवाद

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक भूमि विवाद से जुड़ी 72 प्रतिशत हत्याएं ग्रामीण इलाकों में हुई हैं। गांवों में खेत, मेड़, रास्ता, पुश्तैनी जमीन और बंटवारे को लेकर सबसे अधिक विवाद सामने आते हैं। कृषि भूमि की लगातार बढ़ती कीमत और तेजी से हो रही प्लॉटिंग ने भी तनाव को बढ़ाने का काम किया है।

कई मामलों में रिश्तों की दीवारें भी जमीन के सामने कमजोर पड़ गईं। आंकड़ों के अनुसार 37 प्रतिशत मामलों में पारिवारिक बंटवारा ही हत्या की मुख्य वजह बना। भाई-भाई, चाचा-भतीजा और अन्य रिश्तेदार संपत्ति विवाद को लेकर आमने-सामने आ गए।

हत्या से पहले मिलती रही धमकियां

जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश मामलों में हत्या से पहले दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। कई बार मारपीट, धमकी, फायरिंग और कब्जे को लेकर थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी।

पिछले पांच वर्षों में जमीन विवाद से जुड़े हत्या के प्रयास के 214, गंभीर मारपीट के 486 और अवैध कब्जे के 392 मामले दर्ज किए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 60 प्रतिशत मामलों में पहले से विवाद का रिकॉर्ड पुलिस के पास मौजूद था।

किसान परिवारों से जुड़े अधिकतर आरोपी

भूमि विवाद के मामलों में गिरफ्तार या नामजद किए गए आरोपितों में 61 प्रतिशत लोग कृषि आधारित परिवारों से जुड़े पाए गए। वहीं 68 प्रतिशत आरोपितों की उम्र 25 से 45 वर्ष के बीच रही।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जमीन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के साथ पारिवारिक और सामाजिक तनाव भी बढ़ा है। 29 प्रतिशत मामलों की जड़ म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) विवाद रहा, जबकि 17 प्रतिशत मामलों में एक ही जमीन पर कई लोगों द्वारा दावा किए जाने से संघर्ष की स्थिति बनी।

इसके अलावा कई मामलों में गवाहों के मुकर जाने और समझौते की कोशिशों के कारण जांच प्रभावित होने की बात भी सामने आई है।

पुलिस ने लोगों से की अपील

पटना पश्चिमी क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक (SP) भानु प्रताप सिंह ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी जमीन विवाद में जान का खतरा महसूस हो या धमकी मिल रही हो तो तत्काल पुलिस को सूचना दें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शनिवार को थानों में जनता दरबार आयोजित किया जाता है, जहां दोनों पक्षों को बुलाकर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास किया जाता है।

पुलिस का मानना है कि समय रहते शिकायत और कानूनी समाधान अपनाने से कई संभावित घटनाओं को रोका जा सकता है।

पांच वर्षों में भूमि विवाद से हुई हत्याएं
वर्षकुल हत्याभूमि विवाद में हत्या
202121048
202222555
202324870
202434488
202522467
प्रमुख तथ्य
  • 72% हत्याएं ग्रामीण क्षेत्रों में हुईं
  • 61% आरोपित कृषि आधारित परिवारों से जुड़े
  • 68% आरोपितों की उम्र 25 से 45 वर्ष के बीच
  • 37% मामलों में पारिवारिक बंटवारा मुख्य कारण
  • 29% मामलों की जड़ म्यूटेशन विवाद
  • 17% मामलों में एक ही जमीन पर कई दावेदार
  • 60% मामलों में पहले से विवाद का रिकॉर्ड मौजूद
  • 26% मामलों में गवाह मुकरने या समझौते की कोशिश से जांच प्रभावित हुई

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