AIIMS पटना में मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यहां जल्द ही वर्चुअल ऑटोप्सी (Virtual Autopsy) सेवा शुरू करने की तैयारी चल रही है, जिससे पारंपरिक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी तरह बदल सकती है।
अब तक पोस्टमार्टम में शव को चीर-फाड़ कर मौत के कारणों का पता लगाया जाता था, लेकिन नई तकनीक के जरिए बिना शरीर को काटे ही अंदरूनी जांच संभव होगी। यह प्रणाली पहले से AIIMS नई दिल्ली और AIIMS भोपाल में लागू आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक पर आधारित है।
इस हाई-टेक प्रक्रिया में CT Scan, MRI और 3D इमेजिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इनकी मदद से शरीर के अंदरूनी अंगों, हड्डियों और चोटों की बेहद सूक्ष्म डिजिटल तस्वीरें तैयार होंगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, गोली लगने, आग से जलने या संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामलों में यह तकनीक बेहद कारगर साबित हो सकती है। कई बार पारंपरिक पोस्टमार्टम में भी आंतरिक क्षति या गोली के छर्रों की सही स्थिति का पता लगाना मुश्किल होता है, ऐसे में वर्चुअल ऑटोप्सी अधिक सटीक और वैज्ञानिक विकल्प बनकर उभर रही है।
अब तक AIIMS पटना में 1500 से अधिक पारंपरिक पोस्टमार्टम किए जा चुके हैं, लेकिन हाल के वर्षों में CT स्कैन आधारित जांच से डिजिटल तकनीक की उपयोगिता पहले ही साबित हो चुकी है। यही कारण है कि भविष्य में फॉरेंसिक जांच पूरी तरह तकनीक आधारित होने की संभावना बढ़ गई है।
केंद्र सरकार भी देश के विभिन्न AIIMS संस्थानों में इस तकनीक को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करने की तैयारी में है और इसके लिए बजट स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है।
इस नई प्रणाली में शव को एक विशेष स्कैनर में रखा जाएगा, जहां शरीर की परत-दर-परत जांच की जाएगी और फिर उसका 3D मॉडल तैयार किया जाएगा। सबसे बड़ी खासियत यह है कि पूरी प्रक्रिया महज 30 मिनट में पूरी हो सकती है।
इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि न्यायिक मामलों में सबूत भी ज्यादा मजबूत और पारदर्शी बन सकेंगे। कुल मिलाकर, वर्चुअल ऑटोप्सी फॉरेंसिक विज्ञान में एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकती है, जो बिना लाश को छुए ही मौत के रहस्यों को उजागर करने की क्षमता रखती है।
















