बेगूसराय: जिले के चांदपुरा थाना क्षेत्र स्थित कैथ पंचायत के मुसहर बस्ती इलाके में करीब 100 बीघा भूमि को लेकर चल रहा विवाद अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बनता जा रहा है। जमीन मालिकों ने बिहार सरकार के गन्ना उद्योग मंत्री संजय पासवान पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
जमीन मालिकों का आरोप है कि उनकी वर्षों पुरानी खरीदी गई भूमि पर जबरन कब्जा कराने की कोशिश की जा रही है। विरोध करने पर कथित तौर पर कुछ लोगों द्वारा हमला किया जाता है और खुद को मंत्री संजय पासवान का करीबी बताया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मंत्री की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पुलिस की मौजूदगी में हमले का आरोप
ग्रामीणों और जमीन मालिकों का कहना है कि विवादित भूमि पर कब्जे को लेकर पुलिस की मौजूदगी में भी तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। आरोप है कि विरोध करने पर पत्थरबाजी और धारदार हथियारों से हमला किया गया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि हमलावर खुलेआम खुद को मंत्री के समर्थक बताते रहे।
घटना से जुड़े कुछ वीडियो और तस्वीरें भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिनमें विवाद के दौरान हंगामा और मारपीट जैसी स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
जमीन मालिकों ने लगाए गंभीर आरोप
जमीन मालिक अजय शास्त्री और अशोक सिंह समेत अन्य लोगों का कहना है कि वे वर्षों से उक्त भूमि के वैध मालिक हैं। उनका आरोप है कि भूमि पर अवैध कब्जे की कोशिश की जा रही है और विरोध करने वालों को विभिन्न मामलों में फंसाने तथा एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने की धमकी भी दी जा रही है।
पीड़ित पक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
डीएम और एसपी से लगाई न्याय की गुहार
मामले को गंभीर देखते हुए ग्रामीणों और जमीन मालिकों ने बेगूसराय के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।
इलाके में तनाव का माहौल
घटना के बाद कैथ पंचायत के मुसहर बस्ती इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की जानकारी ली जा रही है।
फिलहाल पूरे विवाद की जांच और दोनों पक्षों के दावों की सत्यता सामने आना बाकी है। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।





















