बेगूसराय में एक बेटी की हिम्मत और साहस ने सात साल पुराने हत्या के मामले में इंसाफ दिला दिया। अदालत में बिना डरे दिए गए उसके बयान ने पूरे मामले की दिशा बदल दी और आखिरकार पिता की हत्या के आरोपियों को सजा मिली।
यह मामला शिक्षक दिवस के दिन हुए एक सनसनीखेज गोलीकांड से जुड़ा है। पीड़िता ने कोर्ट में गवाही देते हुए उस भयावह दिन की पूरी घटना को याद किया। उसने बताया कि दोपहर करीब 1 बजे वह घर में पढ़ाई कर रही थी। उसके पिता स्कूल वाहन से बच्चों को छोड़कर घर लौटे थे और घर के बाहर आराम कर रहे थे।
इसी दौरान पड़ोस के कुछ लोग वहां पहुंचे और अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। बेटी ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने उसके पिता को गोली मार दी। उसने यह भी कहा कि आरोपियों ने उस पर भी फायरिंग की थी, लेकिन वह किसी तरह बच गई।
पीड़िता की स्पष्ट और साहसिक गवाही इस केस का सबसे अहम हिस्सा बनी। अदालत में उसने बिना किसी डर के आरोपियों की पहचान की और पूरी घटना विस्तार से बताई।
करीब सात वर्षों तक चले इस मामले में आखिरकार अदालत ने बेटी की गवाही और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी माना। फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला उन लोगों के लिए मिसाल है जो डर या दबाव के कारण अदालत में सच बोलने से पीछे हट जाते हैं। बेटी के साहस ने न सिर्फ अपने पिता को न्याय दिलाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि सच और हिम्मत अंततः जीतते हैं।
















