पटना: बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने के मुख्यमंत्री के निर्णय का स्वागत करते हुए मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार के लिए औद्योगिकीकरण और युवाओं को रोजगार देना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि चीनी मिलों के बंद होने से गन्ना किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। ऐसे में मिलों के पुनः संचालन से गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
मंत्री ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले को स्वागत योग्य बताते हुए कहा कि सरकार चरणबद्ध तरीके से बंद पड़ी चीनी मिलों को शुरू करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।
‘समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार’ कार्यक्रम की समीक्षा
दरअसल, 13 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री ने ‘7 निश्चय पार्ट-3’ के तहत ‘समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार’ कार्यक्रम की समीक्षा बैठक की। बैठक में गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने जानकारी दी कि गोपालगंज जिले की सासामूसा चीनी मिल को जल्द शुरू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य की सभी बंद पड़ी चीनी मिलों को शीघ्र चालू कराया जाए और इस दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार कर तेजी से अमल किया जाए।
इन जिलों की मिलें हैं बंद
वर्तमान में राज्य के कई जिलों की चीनी मिलें बंद हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- चनपटिया (पश्चिम चंपारण)
- बाराचकिया और मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)
- सासामूसा (गोपालगंज)
- मढ़ौरा (सारण)
- मोतीपुर (मुजफ्फरपुर)
- समस्तीपुर (समस्तीपुर)
- सकरी और रैयाम (दरभंगा)
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी चीनी मिलों के पुनः संचालन से किसानों की आमदनी बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए भी ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
विकसित राज्यों की सूची में शामिल करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने ‘समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार’ योजना को तेजी और प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि बिहार को देश के पांच विकसित राज्यों में शामिल करने के लिए चरणबद्ध एक्शन प्लान के तहत कार्य किया जाए।














