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बिहार कांग्रेस में घमासान तेज: असंतुष्ट नेताओं की दिल्ली कूच, सात नेता छह साल के लिए निष्कासित

पटना/डेस्क रिपोर्ट।
बिहार कांग्रेस इन दिनों हल्के विवादों में नहीं, बल्कि गहरी बगावत की तीव्र आंधी से जूझ रही है। प्रदेश संगठन की उठापटक अब पटना से निकलकर सीधे दिल्ली के सियासी गलियारों तक पहुँच चुकी है। आधा दर्जन से अधिक नाराज़ नेता सोमवार को ही दिल्ली पहुँच गए हैं, जिनमें एआईसीसी सदस्य आनंद माधव और पूर्व विधायक छत्रपति यादव प्रमुख हैं। ये नेता आज राहुल गांधी से मुलाक़ात की तैयारी में हैं और उन्होंने औपचारिक रूप से समय भी माँगा है।

प्रदेश नेतृत्व पर गंभीर आरोप

असंतुष्ट गुट का आरोप है कि प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को तत्काल हटाया जाए। नेताओं का कहना है कि दोनों पर टिकट बेचने से लेकर संगठन को भीतर से कमजोर करने तक के गंभीर आरोप हैं। इन आरोपों ने बिहार कांग्रेस की छवि पर गहरी चोट पहुँचाई है।

पार्टी की कड़ी कार्रवाई: सात नेता निष्कासित

इसी बीच पार्टी ने सोमवार को अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए सात नेताओं को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में हटाए गए नेताओं में शामिल हैं—

  • आदित्य पासवान (पूर्व उपाध्यक्ष, कांग्रेस सेवा दल)
  • शकीलुर रहमान (पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष)
  • राजकुमार शर्मा (पूर्व अध्यक्ष, किसान कांग्रेस)
  • राजकुमार राजन (पूर्व अध्यक्ष, युवा कांग्रेस)
  • कुंदन गुप्ता (पूर्व अध्यक्ष, अति पिछड़ा प्रकोष्ठ)
  • कंचना कुमारी (जिला अध्यक्ष, बांका)
  • रवि गोल्डन (नालंदा)

असंतुष्ट नेता इस कार्रवाई को “मरम्मत नहीं, बल्कि आग में घी डालने” जैसा कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि संगठनात्मक विस्फोट अब खुली जंग में बदल सकता है।

संविधान दिवस पर बड़ा कार्यक्रम—पर संकट की छाया

इसी उथल-पुथल के बीच बिहार कांग्रेस आज संविधान दिवस पर बड़ा राज्यव्यापी कार्यक्रम आयोजित कर रही है। सभी जिला मुख्यालयों में “संविधान संरक्षण और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा” पर विचार गोष्ठी होगी। इसमें वरिष्ठ नेता, वकील, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा शामिल रहेंगे। प्रदेश नेतृत्व ने जिलों को अनुशासन, गंभीरता और अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, साथ ही रिपोर्ट भी भेजने को कहा है।

साख, संघर्ष और अनिश्चित भविष्य

दिल्ली में शिकायतों की परतें खुलेंगी, तो बिहार में संविधान बचाने के आह्वान की गूंज सुनाई देगी—और इनके बीच फंसी है बिहार कांग्रेस की डगमगाती साख, बढ़ती अंदरूनी कलह और अनिश्चित भविष्य की कहानी।

पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट

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