सीतामढ़ी में विकास कार्यों में लापरवाही बरतने वाले संवेदक के खिलाफ सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। ग्रामीण कार्य विभाग ने संबंधित ठेकेदार को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है, जिससे अब उसे किसी भी सरकारी टेंडर में भाग लेने का मौका नहीं मिलेगा।
यह मामला मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना से जुड़ा है। योजना के तहत संवेदक को जिले में तीन महत्वपूर्ण ग्रामीण सड़कों का निर्माण करना था, जिसकी समय-सीमा 30 जुलाई 2025 तय की गई थी। लेकिन तय समय बीत जाने के बावजूद परियोजना की प्रगति बेहद निराशाजनक रही।
विभागीय जांच और स्थल निरीक्षण में सामने आया कि एक सड़क पर काम शुरू तक नहीं हुआ था, जबकि बाकी दो सड़कों को अधूरा छोड़ दिया गया। साइट पर न मशीनरी मौजूद थी और न ही निर्माण सामग्री—जिससे साफ संकेत मिला कि काम को गंभीरता से नहीं लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि संवेदक को कई बार नोटिस जारी कर स्थिति सुधारने को कहा गया, लेकिन हर बार उसने लापरवाही ही दिखाई। लगातार अनदेखी के बाद विभाग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए बिहार ठीकेदारी निबंधन नियमावली 2007 के तहत कार्रवाई की और उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया।
इस फैसले के साथ ही सरकार ने साफ संदेश दिया है कि अब विकास कार्यों में ढिलाई बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। “काम नहीं, तो दाम नहीं” की नीति पर चलते हुए जो भी ठेकेदार नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।














