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13 साल बाद बढ़ेगी बिहार के ग्रामीण इलाकों की सर्किल दर, जमीन के सरकारी रेट में बड़े बदलाव की तैयारी

बिहार के ग्रामीण इलाकों में जमीन के सरकारी मूल्य यानी सर्किल दर को लेकर बड़ा और अहम बदलाव होने जा रहा है। करीब 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों की सर्किल दर बढ़ाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसको लेकर मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने सभी जिलों से प्रस्ताव मंगाए हैं, जिन पर गहन अध्ययन किया जा रहा है। विभागीय संकेतों से साफ है कि आने वाले समय में जमीन के सरकारी रेट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, जिलों से भेजे गए प्रस्तावों में सबसे ज्यादा जोर सड़कों के किनारे स्थित जमीन को कॉमर्शियल श्रेणी में शामिल करने पर दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्किल दर वर्ष 2013 में और शहरी क्षेत्रों में वर्ष 2016 में अंतिम बार संशोधित की गई थी। इसके बाद से जमीन की बाजार कीमतों में भारी उछाल आया है, लेकिन सरकारी दरें अब भी काफी कम बनी हुई हैं।

मौजूदा स्थिति यह है कि ग्रामीण इलाकों में खेती योग्य जमीन की बाजार कीमत सरकारी दर से लगभग दोगुनी हो चुकी है, जबकि मुख्य सड़कों और हाईवे के किनारे स्थित जमीन का बाजार भाव सरकारी रेट के मुकाबले चार गुना से लेकर 10 गुना तक पहुंच चुका है। इस अंतर के कारण जमीन की रजिस्ट्री, अधिग्रहण और सरकारी परियोजनाओं में लगातार विवाद की स्थिति बन रही है।

निबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शहरों के बाहर से गुजरने वाली नई सड़कों और विभिन्न जिलों को जोड़ने वाली चौड़ी सड़कों को व्यवसायिक प्रधान सड़क और व्यवसायिक मुख्य सड़क घोषित किया जाएगा। वहीं, गांवों के भीतर की सड़कों को आवासीय मुख्य सड़क और आवासीय सहायक सड़क की श्रेणी में बांटकर नई न्यूनतम मूल्य दर (MVR) तय की जाएगी। इसी आधार पर नई सर्किल दर लागू होगी।

जिलों से प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा के बाद विभाग अपने स्तर पर अंतिम मसौदा तैयार करेगा। इसके बाद इसे राज्य सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही नई सर्किल दर पूरे राज्य के ग्रामीण इलाकों में लागू कर दी जाएगी।

सर्किल दर बढ़ने से रैयतों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। जमीन अधिग्रहण के दौरान उन्हें बाजार भाव के करीब मुआवजा मिलेगा, जिससे लंबे समय से चले आ रहे विवाद और विरोध की संभावनाएं कम होंगी। साथ ही सरकार के लिए भी सड़क, पुल, आवास और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए जमीन जुटाना आसान हो जाएगा, जिससे कई लंबित योजनाओं को रफ्तार मिलेगी।

हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी सामने आ रहा है। सर्किल दर बढ़ते ही जमीन की खरीद-फरोख्त महंगी हो जाएगी। चूंकि स्टांप शुल्क (करीब 4–5 प्रतिशत) और निबंधन शुल्क (लगभग 2 प्रतिशत) सर्किल दर के आधार पर तय होते हैं, इसलिए जमीन की रजिस्ट्री पर आम लोगों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, बिहार के ग्रामीण इलाकों में सर्किल दर बढ़ाने की यह कवायद जमीन बाजार, सरकारी योजनाओं और आम रैयतों—तीनों के लिए दूरगामी असर डालने वाली साबित होगी। अब सबकी नजर सरकार के अंतिम फैसले और नई दरों के ऐलान पर टिकी है।

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