बिहार में शहरी विकास को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के 7 प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
सरकार 11 नए आधुनिक सेटेलाइट टाउनशिप बसाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इन शहरों को प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के आधार पर नाम दिया जाएगा और इन्हें दिल्ली-मुंबई की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, जहां चौड़ी सड़कें, सुनियोजित कॉलोनियां, हरित क्षेत्र और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर होगा।
किन क्षेत्रों में लगी रोक
नगर विकास विभाग ने मास्टर प्लान तैयार करने के तहत पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर के प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की रजिस्ट्री और निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 30 मार्च 2027 तक लागू रहेगा, ताकि अनियोजित विकास को रोका जा सके।
‘पाटलिपुत्र’ टाउनशिप बनेगा सबसे बड़ा प्रोजेक्ट
पटना जिले के पुनपुन क्षेत्र में ‘पाटलिपुत्र’ नाम से एक विशाल टाउनशिप विकसित की जाएगी। यह परियोजना करीब 81 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली होगी और 275 राजस्व गांवों को कवर करेगी। इसका कोर एरिया 1010 एकड़ और स्पेशल एरिया लगभग 81,730 एकड़ निर्धारित किया गया है। यह क्षेत्र पटना जंक्शन से करीब 20 किलोमीटर दूर होगा।
सोनपुर और गया में भी बड़े प्लान
सारण जिले के सोनपुर में प्रस्तावित टाउनशिप सोनपुर, दरियापुर, परसा और दिघवारा प्रखंडों में फैलेगी, जिसका कोर एरिया 2000 एकड़ और स्पेशल एरिया करीब 33 हजार एकड़ होगा।
वहीं गया में ‘मगध टाउनशिप’ बोधगया, गया टाउन और परैया प्रखंडों में विकसित की जाएगी, जहां 1629 एकड़ कोर एरिया और 22,200 एकड़ स्पेशल एरिया तय किया गया है।
क्या होंगे फायदे
सरकार का मानना है कि इन सेटेलाइट टाउनशिप के बनने से राज्य में नए आर्थिक केंद्र विकसित होंगे। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, निवेश आएगा और बड़े शहरों पर जनसंख्या का दबाव कम होगा। साथ ही लोगों को बेहतर शहरी सुविधाएं और योजनाबद्ध जीवनशैली मिल सकेगी।
ये टाउनशिप देश के अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे नवी मुंबई की तर्ज पर विकसित किए जाएंगे, जहां सुव्यवस्थित सेक्टर, हरित क्षेत्र और बेहतर कनेक्टिविटी देखने को मिलती है।














