पटना। बिहार विधान परिषद द्विवार्षिक चुनाव 2026 को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपने-अपने कोटे से चार-चार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जबकि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अशरफ अंसारी को उम्मीदवार बनाया है। इसके साथ ही एनडीए ने सभी उपलब्ध सीटों पर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है।
भाजपा ने भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह, डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार घोषित किया है। वहीं जदयू ने निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति तथा उपचुनाव के लिए ललन प्रसाद के नाम पर मुहर लगाई है। दूसरी ओर, लोजपा (रामविलास) द्वारा अशरफ अंसारी को उम्मीदवार बनाए जाने को सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बड़ा झटका लगा है। राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से चर्चा थी कि उन्हें विधान परिषद भेजा जा सकता है, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया।
दीपक प्रकाश फिलहाल राज्य सरकार में मंत्री हैं, लेकिन वे न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के। संविधान के अनुसार किसी भी मंत्री को नियुक्ति के छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक होता है। ऐसा नहीं होने पर मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। ऐसे में यह चुनाव उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोजपा (रामविलास) को एक सीट मिलने से एनडीए के भीतर पार्टी का राजनीतिक महत्व और बढ़ा है। वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से पार्टी खेमे में निराशा देखी जा रही है।
विधान परिषद चुनाव के गणित पर नजर डालें तो मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर एनडीए की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। गठबंधन के पास पर्याप्त विधायक होने के कारण उसके सभी उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में चुनाव से अधिक चर्चा उम्मीदवारों के चयन और उससे जुड़े राजनीतिक संदेशों को लेकर हो रही है।














