Motihari के अरेराज प्रखंड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां बीसीओ कार्यालय में तैनात डाटा ऑपरेटर सगीर आलम को लेकर ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
जानकारी के अनुसार, 7 जुलाई 2025 को उसकी नियुक्ति डाटा ऑपरेटर के पद पर हुई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वह एक दिन भी कार्यालय नहीं पहुंचा। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उसकी नियमित उपस्थिति दर्ज होती रही और हर महीने करीब 28 हजार रुपये वेतन का भुगतान किया जाता रहा।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यह पूरा मामला विभागीय मिलीभगत का नतीजा है, जहां बिना काम किए ही सरकारी खजाने से पैसा निकाला जाता रहा। आरोप यह भी है कि संबंधित कर्मचारी ड्यूटी से दूर रहकर नेपाल में निजी मौज-मस्ती में लगा रहा।
मामले का खुलासा तब हुआ जब अरेराज के बीडीओ Aditya Dixit ने फसल क्षति रिपोर्ट के दौरान कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि संबंधित डाटा ऑपरेटर कभी कार्यालय आया ही नहीं।
पूछताछ में उसने अलग-अलग जगहों पर ड्यूटी करने का दावा किया, लेकिन जांच में ये बातें भी गलत साबित हुईं। इसके बाद जब उसके मोबाइल और निजी सामान की जांच की गई, तो कई आपत्तिजनक फोटो-वीडियो और नेपाल यात्रा से जुड़े होटल-रेस्टोरेंट के बिल बरामद हुए।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि बिना किसी वास्तविक उपस्थिति के भी उसे लगातार वेतन मिलता रहा, जिससे सरकारी खजाने को हर महीने भारी नुकसान होता रहा। यह मामला न केवल लापरवाही बल्कि सिस्टम के अंदर गहरे स्तर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
फिलहाल बीडीओ ने संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा है और मामले में कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस खुलासे के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।














