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Bihar News: नवादा घटना पर गरमाई सियासत, तेजस्वी यादव ने प्रशासन को घेरा, जांच रिपोर्ट में कई सवाल

बिहार की सियासत में नवादा की एक घटना ने अचानक राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। जिले के रोह प्रखंड में 28 मार्च को हुई सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली वारदात को लेकर विपक्ष ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।

राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव और प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने घटना के बाद तत्काल संज्ञान लेते हुए एक जांच कमेटी का गठन किया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक समरसता के लिए खतरनाक हैं और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

जांच कमेटी की अगुवाई पूर्व मंत्री मो. इसराइल मंसूरी को सौंपी गई। उनके नेतृत्व में नौ सदस्यीय टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और पूरे मामले की गहराई से जांच की। टीम में शामिल वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। साथ ही स्थानीय लोगों से बातचीत कर घटना की वास्तविक स्थिति को समझने की कोशिश की गई।

जांच के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कमेटी के अनुसार, घटना से पहले शांति समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे, लेकिन उन पर अमल नहीं किया गया। खास तौर पर डीजे बजाने पर रोक लगाने का फैसला लिया गया था, बावजूद इसके कार्यक्रम में डीजे बजते रहे और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।

मो. इसराइल मंसूरी ने साफ कहा कि यदि प्रशासन समय रहते सतर्कता बरतता, तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण ही हालात बिगड़े और सामाजिक तनाव बढ़ा।

राजद ने राज्य सरकार से मांग की है कि इस घटना में जिन गरीब परिवारों की दुकानें जला दी गईं और जिनका सामान लूटा गया, उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाए। पार्टी का कहना है कि इस घटना ने कई परिवारों को आर्थिक संकट में धकेल दिया है और उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है।

इसके साथ ही राजद ने यह भी चेतावनी दी है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, लेकिन निर्दोष लोगों को फंसाने की राजनीति से बचा जाए। पार्टी ने निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करने की मांग दोहराई है।

फिलहाल इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन नवादा की इस घटना ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

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