भागलपुर: भागलपुर और नवगछिया के बीच गंगा पार आवागमन को लेकर बिहार सरकार की बड़ी घोषणा अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary द्वारा नाव और जहाज सेवा को अस्थायी रूप से निःशुल्क किए जाने के ऐलान के एक दिन बाद ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नोट: वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री ने किया था मुफ्त सेवा का ऐलान
रविवार को विक्रमशिला सेतु के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की थी कि जब तक पुल पूरी तरह चालू नहीं हो जाता, तब तक गंगा पार करने वाले यात्रियों और निजी वाहनों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
उन्होंने कहा था कि सरकार स्वयं इसकी व्यवस्था करेगी ताकि लोगों को आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो और अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न उठाना पड़े।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई चर्चा
सोमवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में कुछ नाविक कथित तौर पर यात्रियों से गंगा पार कराने के बदले किराया लेते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर मुख्यमंत्री की घोषणा का पालन जमीनी स्तर पर क्यों नहीं हो रहा है।
हालांकि वीडियो की सत्यता और उसमें दिख रहे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
लोगों में बढ़ी नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की घोषणा के बाद उन्हें बड़ी राहत की उम्मीद थी। प्रतिदिन गंगा पार कर कामकाज, व्यापार और शिक्षा के लिए आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को लगा था कि अब उन्हें अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा।
लेकिन यदि किराया वसूली के दावे सही साबित होते हैं, तो यह सरकारी घोषणा और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दर्शाता है।
प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं तो फिर स्थानीय स्तर पर उनके पालन की जिम्मेदारी किसकी है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या संबंधित विभाग और जिला प्रशासन को निर्देशों की पूरी जानकारी नहीं है या फिर उन्हें लागू कराने में लापरवाही बरती जा रही है।
राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज
मामला सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग सकते हैं कि जनता को राहत देने के लिए की गई घोषणा के बावजूद कथित वसूली कैसे जारी रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक तंत्र के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावे जांच में सही साबित होते हैं तो यह सरकार और प्रशासन दोनों के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।





















