बिहार की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बागी कुमार वर्मा का सोमवार देर रात दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही बिहार के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। लंबे समय तक उनके निजी सहायक रहे जयंत बाबू ने उनके निधन की पुष्टि की है।
बागी कुमार वर्मा बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय और समाजवादी विचारधारा के मजबूत चेहरों में गिने जाते थे। उनका राजनीतिक सफर कई दशकों तक सक्रिय और प्रभावशाली रहा। वे तीन बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने दो बार मखदुमपुर विधानसभा क्षेत्र और एक बार अरवल जिले की कुर्था सीट का प्रतिनिधित्व किया।
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की सरकार में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली थी। राजनीति उन्हें विरासत में मिली थी, क्योंकि वे समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र नाथ वर्मा के पुत्र थे। यही वजह रही कि वे शुरू से ही सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रहे।
अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव भी देखे। वर्ष 2014 में उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के टिकट पर औरंगाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें जीत नहीं मिल सकी। बाद में वर्ष 2019 में उन्होंने जदयू छोड़कर फिर से राजद का दामन थाम लिया। इसके बाद 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में कुर्था सीट से जीत हासिल कर उन्होंने अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत होने का संदेश दिया।
बागी कुमार वर्मा के निधन के बाद राजद समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। कई नेताओं ने उन्हें जमीन से जुड़ा हुआ नेता बताते हुए सामाजिक न्याय की राजनीति का मजबूत चेहरा बताया।
जानकारी के अनुसार उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से पटना लाया जा रहा है। मंगलवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन से समर्थकों और कार्यकर्ताओं में भी गम का माहौल है।
बता दें कि उनका परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनकी भावज डॉ. कुमुद वर्मा वर्तमान में जदयू से विधान पार्षद हैं। बिहार की राजनीति में बागी कुमार वर्मा को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दौर में अपनी मजबूत पहचान बनाए रखी।
















