नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव हाल ही में केरल गए थे, जहाँ उन्होंने बिहार को देश का सबसे गरीब और पिछड़ा राज्य बताया। शनिवार देर शाम केरल से लौटने के बाद तेजस्वी यादव ने बिहार की स्थिति पर एक बार फिर अपनी चिंता व्यक्त की और राज्य की कमियों को गिनाया।
बिहार के आर्थिक और सामाजिक संकेतक
तेजस्वी यादव ने बिहार को हर क्षेत्र में पीछे बताया। उनके अनुसार:
- बिहार की साक्षरता दर, प्रति व्यक्ति आय, किसानों की आय, प्रति व्यक्ति निवेश, प्रति व्यक्ति उपभोग, ग्रामीण प्रति व्यक्ति आय और बिजली खपत देश में सबसे कम है।
- अपराध, गरीबी, पलायन, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी में बिहार देश में सबसे आगे है।
- हिंसक अपराध, अपहरण, और प्रदूषण के मामले में बिहार चिंताजनक स्थिति में है।
- शिक्षा में स्कूल ड्रॉप आउट रेट, प्यूपिल-टीचर अनुपात, और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में बिहार सबसे पीछे है।
- प्रति एक लाख आबादी पर कॉलेजों की संख्या सबसे कम है।
स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति
तेजस्वी यादव ने स्वास्थ्य और पोषण के आंकड़े भी साझा किए:
- देश में सबसे अधिक अंडरवेट बच्चे और स्टंटेड (बौने) बच्चे बिहार में हैं।
- एनीमिक महिलाएं, मल्टी डायमेंशनल पावर्टी, और डॉक्टरों के रिक्त पदों की संख्या सबसे अधिक बिहार में है।
- लगभग 58% डॉक्टरों के पद रिक्त हैं।
- झोपड़ी में रहने वाले लोगों की संख्या देश में सबसे अधिक है।
औद्योगीकरण और सेवाओं में पिछड़ापन
तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार आधुनिक सुविधाओं, औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक विकास के मामलों में सबसे पीछे है। उनके अनुसार, राज्य की यह स्थिति पिछले 21 वर्षों की NDA सरकार और डबल इंजन सरकार के शासनकाल में भी सुधार नहीं हो पाई।
चुनाव और सरकारी तंत्र पर आरोप
तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार अपनी असफलता छुपाने के लिए चुनाव आयोग, भ्रष्ट अधिकारियों और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है। वे खुली चुनौती देते हुए कह रहे हैं कि सीएम नीतीश कुमार और दोनों उपमुख्यमंत्री किसी भी सार्वजनिक मंच पर उनसे बहस कर सकते हैं।
तेजस्वी की चुनौती
तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर स्पष्ट किया कि वे हर समय, किसी भी मंच पर सरकार के प्रदर्शन और बिहार की पिछड़ी स्थिति पर बहस करने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि जब तक समस्याओं को पहचान कर उनका समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक सरकार सफेद झूठ और खोखले दावे जारी रखेगी।
तेजस्वी यादव की यह खुली चुनौती और बिहार की पिछड़ी हालत राजनीतिक हलकों में सियासी सरगर्मी बढ़ा रही है। राज्य में शिक्षा, रोजगार, औद्योगिक विकास और स्वास्थ्य के तमाम सूचकांक लगातार राष्ट्रीय औसत से पीछे हैं, और यह विपक्ष के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।














