देश पहले से ही आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, और अब अल-नीनो की बढ़ती सक्रियता ने कृषि क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। मौसम वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस बार मानसून प्रभावित होने पर बिहार समेत कई राज्यों में धान उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में चावल मुख्य खाद्य फसल है। ऐसे में बारिश कम होने या मानसून कमजोर पड़ने से खेती और खाद्य सुरक्षा दोनों पर संकट गहरा सकता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के एक अध्ययन के मुताबिक, पिछले अल-नीनो वर्षों में देश के 77 जिलों में चावल उत्पादन 10 प्रतिशत से ज्यादा घट गया था। मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी फसलें भी प्रभावित हुई थीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इस बार अल-नीनो मजबूत रहा तो खरीफ सीजन में भारी नुकसान हो सकता है।
इधर बिहार समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में भीषण गर्मी ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना के बीच मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। ऐसे में कमजोर मानसून किसानों की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अब पारंपरिक खेती के तरीके पर्याप्त नहीं हैं। किसानों को कम पानी वाली फसलें, सूखा सहन करने वाली किस्में और आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर सिर्फ किसानों की आमदनी पर नहीं, बल्कि बाजार में चावल की कीमतों और देश की खाद्य आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।















