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बिहार में सड़क हादसे: 1,044 ब्लैक स्पॉट्स, 50 हजार से ज्यादा मौतें, अटल पथ पर सियासी बहस तेज

बिहार में बढ़ते सड़क हादसों ने सरकार और जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है। छोटे कस्बों से लेकर राज्य राजमार्गों और राजधानी की सड़कों तक दुर्घटनाएं आम खबर बन चुकी हैं।

1,044 ‘ब्लैक स्पॉट’ चिन्हित

सरकार ने स्वीकार किया है कि राज्य की लगभग सभी प्रमुख सड़कों पर हादसे हो रहे हैं। पथ निर्माण विभाग के अनुसार पूरे बिहार में 1,044 स्थानों को ‘ब्लैक स्पॉट’ के रूप में चिन्हित किया गया है — यानी वे जगहें जहां बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं और जान-माल का भारी नुकसान होता है।

पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि इन स्थलों पर सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है।

  • खतरनाक मोड़ों को दुरुस्त किया जा रहा है
  • डिवाइडर मजबूत किए जा रहे हैं
  • रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड और चेतावनी संकेत लगाए जा रहे हैं
  • प्रकाश व्यवस्था सुधारी जा रही है

सरकार का दावा है कि सड़क सुरक्षा को महज कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा। व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी है, ताकि लोग ट्रैफिक नियमों का पालन अपनी आदत बनाएं।


सदन में गूंजे डराने वाले आंकड़े

सोमवार को बिहार विधान परिषद में सड़क हादसों का मुद्दा उठा तो आंकड़ों ने सदन को सन्न कर दिया।

निर्दलीय पार्षद महेश्वर सिंह ने तारांकित प्रश्न के जरिए पूर्वी चंपारण, खासकर मोतिहारी में बढ़ते हादसों पर सरकार से जवाब मांगा।

  • 2019 से 2026 के बीच 50,941 मौतें
  • लगभग 44,000 लोग घायल
  • मरने वालों में करीब 50% युवा (18–35 वर्ष)

महेश्वर सिंह ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हालात बेहद गंभीर हैं।


अटल पथ पर ‘डेथ ट्रैप’ की बहस

राजधानी पटना की आधुनिक सड़क अटल पथ को लेकर भी सियासत गरमा गई है।

कांग्रेस सदस्य मदन मोहन झा के सवाल के बाद सदस्य समीर कुमार सिंह ने पूछा कि क्या अटल पथ अब देश की सबसे असुरक्षित सड़कों में शुमार हो चुकी है?

समीर कुमार सिंह का दावा था कि यहां आए दिन हादसे होते हैं और चीख-पुकार सुनाई देती है।

मंत्री दिलीप जायसवाल ने जवाब दिया:

  • फुट ओवरब्रिज मौजूद हैं
  • सर्विस रोड की व्यवस्था है
  • पर्याप्त साइन बोर्ड लगाए गए हैं
  • गति सीमा स्पष्ट है

लेकिन सीसीटीवी फुटेज के अनुसार फुट ओवरब्रिज का इस्तेमाल मात्र 5 से 10 लोग ही करते हैं।


असली सवाल क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर काफी नहीं है।

  • सख्त प्रवर्तन
  • ट्रैफिक नियमों का कठोर पालन
  • व्यापक जन-जागरूकता
  • और पारदर्शी कार्रवाई

इन सबका संगम ही हादसों पर लगाम लगा सकता है।

अब असली इम्तिहान यह है कि चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर कार्रवाई कितनी तेजी और पारदर्शिता से होती है। क्या सड़क सुरक्षा चुनावी मुद्दे से आगे बढ़कर जन-सुरक्षा का स्थायी एजेंडा बन पाएगी — यही सबसे बड़ा सवाल है।

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