बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए Nitish Kumar सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य कैबिनेट के फैसले के बाद अब गृह विभाग ने बिहार स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस (एसएपी) में 17 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज कर दी है। इस बार भर्ती के दायरे का विस्तार करते हुए सेना के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों से सेवानिवृत्त जवानों को भी मौका देने का निर्णय लिया गया है।

अब तक एसएपी में केवल भारतीय सेना के पूर्व जवानों को कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर नियुक्त किया जाता था। लेकिन पहली बार अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड कर्मियों को भी सीधे भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि अनुभवी और प्रशिक्षित जवानों की तैनाती से राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बेहतर होगी।
वित्तीय मंजूरी का प्रस्ताव भेजा गया
इस योजना को लागू करने के लिए गृह विभाग की ओर से बजट और वित्तीय मंजूरी का प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव में जवानों के मानदेय में बढ़ोतरी का भी प्रावधान शामिल है।
- जूनियर कमीशंड ऑफिसर का मासिक मानदेय 35,000 रुपये से बढ़ाकर 40,000 रुपये करने की योजना है।
- एसएपी जवानों का मानदेय 25,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव है।
सरकार के अनुमान के अनुसार, 17 हजार पदों पर बढ़े हुए वेतन के साथ भर्ती करने पर राज्य के खजाने पर हर साल करीब 642 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

कितने पदों पर होगी भर्ती?
प्रस्तावित भर्ती में लगभग:
- 150 अधिकारी
- 16,300 जवान
- 550 अन्य पद
शामिल किए जाएंगे।
क्यों जरूरी है यह कदम?
बिहार की आबादी करीब 13 करोड़ के आसपास है और इसके मुकाबले पुलिस बल की संख्या अपेक्षाकृत कम मानी जाती है। ऐसे में सरकार का मानना है कि एसएपी के जरिए प्रशिक्षित और अनुभवी जवानों की तैनाती से पुलिसिंग में तेजी आएगी और आम नागरिकों को ज्यादा सुरक्षित माहौल मिल सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, सेवानिवृत्त सैन्य और अर्धसैनिक बलों के जवानों का अनुभव राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
सरकार का यह कदम आने वाले समय में बिहार की कानून-व्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।














