केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बिहार की सम्राट सरकार को बड़ा झटका दिया है। राज्य सरकार द्वारा भेजे गए 6 लाख मिट्टी नमूना जांच के प्रस्ताव में केंद्र ने करीब 75% कटौती करते हुए सिर्फ 1.5 लाख नमूनों की जांच को मंजूरी दी है।
इस फैसले के बाद राज्य के कृषि विभाग में हलचल तेज हो गई है। अब विभाग जिलावार नए लक्ष्य तय करने में जुटा है और जल्द ही संशोधित प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को दोबारा भेजेगा।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में मिट्टी जांच के लक्ष्य में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2025-26 में 3 लाख नमूनों का लक्ष्य था, जिसे अब घटाकर आधा कर दिया गया है। इससे पहले 2024-25 में 5 लाख और 2023-24 में 2 लाख नमूनों की जांच का लक्ष्य तय किया गया था।
बता दें कि यह कार्य केंद्र प्रायोजित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किया जाता है, जिसमें 60% खर्च केंद्र और 40% राज्य सरकार वहन करती है।
मिट्टी जांच के जरिए खेत की उर्वरता और पोषक तत्वों की जानकारी मिलती है, जिसके आधार पर किसानों को डिजिटल सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किया जाता है। इस कार्ड में 100 से अधिक फसलों के लिए उर्वरक की सटीक सिफारिश दी जाती है, जिससे उत्पादन बढ़ाने और रासायनिक खाद के संतुलित उपयोग में मदद मिलती है।
बिहार के सभी 38 जिलों में मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं संचालित हैं। इसके अलावा प्रमंडल स्तर पर 46 लैब, 3 रेफरल लैब, 4 गुणवत्ता नियंत्रण लैब और 7 बीज परीक्षण प्रयोगशालाएं भी कार्यरत हैं।
केंद्र की इस कटौती से किसानों को परेशानी हो सकती है, हालांकि राज्य सरकार संशोधित प्रस्ताव के जरिए इस कमी को पूरा करने की कोशिश में जुटी है।


















