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विधानसभा अध्यक्ष को लेकर बिहार की सियासत गरम, क्या भाजपा पहली बार महिला स्पीकर देगी?

बिहार की सियासी फिजा इन दिनों विधानसभा अध्यक्ष के नाम को लेकर खासा गर्म है। एनडीए के भीतर लगभग तय माना जा रहा है कि स्पीकर की कुर्सी इस बार भाजपा के खाते में जाएगी। लेकिन इस बार असली राजनीतिक चर्चा इस संभावना के इर्द-गिर्द घूम रही है कि क्या भाजपा पहली बार किसी महिला विधायक को बिहार विधानसभा अध्यक्ष बनाकर नया इतिहास रचने की तैयारी में है।

रेणु देवी का बयान बढ़ा गया अटकलों का तापमान

इसी बीच पूर्व उप मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रेणु देवी का ताजा बयान राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा—
“मैं भाजपा की कार्यकर्ता हूं, पद मेरी लालसा नहीं। जो भी पार्टी का फैसला होगा, वह सिर-आंखों पर।”

यह बयान भले ही सादगीपूर्ण लगे, लेकिन सियासी हलकों में इसे एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि उनका नाम दावेदारों की कतार में शामिल है—चाहे वह स्वयं दावा न कर रही हों।

महिला वोटरों और महिला विधायकों की बढ़ी ताकत

इस चुनाव में महिलाओं ने एनडीए के पक्ष में पुरुषों की तुलना में साढ़े आठ प्रतिशत अधिक मतदान करके जीत में अहम योगदान दिया।
भाजपा के 101 विजयी उम्मीदवारों में से 10 महिला विधायक शामिल हैं। इनमें—

रेणु देवी (बेतिया) – अति पिछड़ा समाज से, पूर्व उप मुख्यमंत्री

गायत्री देवी (परिहार) – लगातार पांचवीं जीत

छोटी कुमारी (छपरा) – पहली बार विधायक

मैथिली ठाकुर (अलीनगर) – पहली बार सदन में

निशा सिंह, कविता देवी, संगीता देवी – अपना दूसरा कार्यकाल निभा रहीं

पूरे एनडीए में कुल 26 महिला विधायक चुनी गई हैं—
भाजपा: 10, जदयू: 10, हम: 2, लोजपा (आर): 3, रालोमो: 1।
वहीं राजद से मात्र तीन महिला विधायक सदन तक पहुंची हैं।

अनुभवी डॉ. प्रेम कुमार भी दौड़ में मजबूत दावेदार

हालांकि भाजपा के भीतर फिलहाल सबसे गहन चर्चा डॉ. प्रेम कुमार के नाम की है।
चंद्रवंशी समाज और मगध क्षेत्र से आने वाले डॉ. प्रेम कुमार पार्टी के सबसे अनुभवी चेहरों में से एक हैं और कई विभागों में मंत्री रह चुके हैं।

इसके साथ ही—

नई सरकार में डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी को मंत्री बनाना

और पिछले वर्ष डॉ. भीम सिंह को राज्यसभा भेजना

—इस समुदाय की राजनीतिक अहमियत को और मजबूत करता है। इससे चर्चाओं को और धार मिली है कि भाजपा समाजिक समीकरण को साधते हुए उन्हें स्पीकर बनाने का फैसला ले सकती है।

अब निगाहें भाजपा के बड़े फैसले पर

बड़ा सवाल यही है कि भाजपा किस दिशा में जाएगी—

क्या वह परंपरा निभाते हुए अनुभवी चेहरा डॉ. प्रेम कुमार को यह अहम जिम्मेदारी देगी?

या

महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाते हुए पहली महिला स्पीकर बनाकर नया अध्याय लिखेगी?

विधानसभा अध्यक्ष के सिंहासन को लेकर यह सियासी रस्साकशी फिलहाल बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित और गरम मुद्दा बन चुकी है।

पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट

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