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विक्रमशिला सेतु हादसा: डर, दहशत और सिस्टम पर सवाल

बिहार के भागलपुर में स्थित विक्रमशिला सेतु रविवार देर रात अचानक खौफनाक हादसे का गवाह बन गया। पूर्वांचल को सीमांचल से जोड़ने वाला यह अहम पुल उस वक्त दहशत में डूब गया, जब आधी रात के सन्नाटे में पिलर नंबर 133 ने जवाब दे दिया और देखते ही देखते पुल का एक बड़ा हिस्सा गंगा नदी में समा गया।

सूत्रों के मुताबिक, रात करीब 11:55 बजे से ही पिलर में हलचल और कंपन महसूस होने लगा था। ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने जैसे ही स्थिति की गंभीरता को समझा, तुरंत वायरलेस के जरिए अलर्ट जारी किया गया। हालात बिगड़ते देख प्रशासन हरकत में आया और एहतियातन पुल पर आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई।

रात 1:07 बजे वह खौफनाक पल आया, जब जोरदार धमाके के साथ पुल का स्लैब ध्वस्त होकर गंगा में गिर पड़ा। आवाज इतनी तेज थी कि दूर-दराज के इलाकों तक इसकी गूंज सुनाई दी। अगर उस समय ट्रैफिक चालू होता, तो यह हादसा सैकड़ों जिंदगियों को निगल सकता था।

पहले से थी खतरे की आहट?

इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, पिलर नंबर 133 पहले से ही कमजोर बताया जा रहा था। इतना ही नहीं, उसकी प्रोटेक्शन वॉल भी करीब एक महीने पहले क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। इसके बावजूद मरम्मत का काम समय पर नहीं हुआ—और यहीं से लापरवाही की बू तेज हो जाती है।

क्या यह सिर्फ एक हादसा है, या सिस्टम की बड़ी नाकामी? यह सवाल अब हर किसी के मन में है।

ट्रैफिक पर असर, जांच के आदेश

हादसे के बाद प्रशासन ने तुरंत कदम उठाते हुए घोंघा, सबौर, जगदीशपुर और केजरेली जैसे इलाकों में भारी वाहनों की एंट्री पर रोक लगा दी है। इसका असर अब शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर साफ दिख रहा है—जगह-जगह जाम की स्थिति बनती जा रही है।

करीब 4.7 किलोमीटर लंबे इस पुल का निर्माण 2001 में शुरू हुआ था और यह रोजाना लाखों लोगों की जीवनरेखा बना हुआ था। फिलहाल जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारी तैयारियां सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित हैं?

राहत की बात, लेकिन चेतावनी भी

सबसे बड़ी राहत यह रही कि समय रहते पुल को खाली करा लिया गया, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन यह घटना एक बड़ी चेतावनी है—अगर अब भी लापरवाही जारी रही, तो अगली बार किस्मत इतनी मेहरबान हो, इसकी कोई गारंटी नहीं।

अब जरूरत है—जवाबदेही की, पारदर्शिता की और सबसे बढ़कर, समय पर कार्रवाई की।

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