बिहार में एक और भर्ती परीक्षा विवादों के घेरे में आ गई है। Bihar Public Service Commission (BPSC) द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा को आखिरकार रद्द कर दिया गया है। इस फैसले के पीछे जो वजहें सामने आई हैं, उन्होंने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस और जांच एजेंसियों को इस मामले में एक संगठित गिरोह के शामिल होने की आशंका है। Nalanda के सोहसराय और Patna में हुई छापेमारी के दौरान जो आंसर की बरामद हुई, वह सही पाई गई। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिला है कि यह आंसर की परीक्षा शुरू होने से पहले ही तैयार कर ली गई थी, जिससे पूरे पेपर लीक नेटवर्क की आशंका और गहरी हो गई है।
अब तक इस मामले में तीन दर्जन से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। इनमें परीक्षा ड्यूटी में लगे कर्मचारी, बायोमेट्रिक ऑपरेटर, अभ्यर्थी और अन्य संदिग्ध शामिल हैं। Munger से गिरफ्तार 22 आरोपियों से देर रात तक पूछताछ की गई, जिसमें कई अहम सुराग हाथ लगे। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आयोग ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया।
जांच में एक और बड़ा एंगल सामने आया है—बायोमेट्रिक एजेंसी की भूमिका। BPSC ने बायोमेट्रिक उपस्थिति के लिए Sai Educare Private Limited को जिम्मेदारी दी थी। आरोप है कि इसी एजेंसी के कुछ कर्मचारी परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न पत्र की तस्वीर खींचकर व्हाट्सऐप और टेलीग्राम के जरिए बाहर भेजते थे। इसके बाद ‘सॉल्वर गैंग’ सवालों के जवाब तैयार कर वापस भेजता था, जिसे सेटिंग वाले अभ्यर्थियों तक पहुंचाया जाता था।
हैरानी की बात यह है कि इस एजेंसी को पहले National Testing Agency (NTA) द्वारा ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, फिर भी इसे काम सौंपा गया। अब इस पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसी एजेंसी को दोबारा जिम्मेदारी कैसे मिली।
इस पूरे मामले की जांच Economic Offences Unit (EOU) कर रही है, जिसने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। 18 अप्रैल को जांच शुरू हुई और महज 13 दिनों के भीतर परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया।
गौरतलब है कि AEDO परीक्षा के लिए करीब 11 लाख अभ्यर्थियों ने 935 पदों के लिए आवेदन किया था। परीक्षा 14 से 21 अप्रैल के बीच 9 पालियों में आयोजित की गई थी, जिसे अब पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है। इसके साथ ही लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी की परीक्षा भी रद्द कर दी गई है और संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
हालांकि BPSC का कहना है कि प्रश्न पत्र लीक होने का कोई ठोस प्रमाण अब तक नहीं मिला है। आयोग के मुताबिक, किसी भी प्रश्न पत्र के बाहर जाने की पुष्टि नहीं हुई है और सोशल मीडिया पर फैली खबरों से परीक्षा की छवि खराब करने की कोशिश की गई। इसके बावजूद पारदर्शिता बनाए रखने और ईमानदार अभ्यर्थियों के हित में परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया।
साथ ही कुछ परीक्षा केंद्रों पर ब्लूटूथ जैसे उपकरणों के जरिए नकल करने की कोशिश करने वाले लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और 32 अभ्यर्थियों को भविष्य की परीक्षाओं से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद क्या बड़े नाम सामने आएंगे या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में सिमट कर रह जाएगा।


















